कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने प्रदेश में कारोबार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए अनुपालन में कमी (कम्प्लायंस रिडक्शन) एवं विनियमन-सरलीकरण (डी-रेग्यूलेशन) अभियान के तहत बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 28 प्राथमिकता वाले सुधारों में से 21 सुधारों को स्वीकृति दे दी है। इसके साथ ही हरियाणा केंद्र सरकार के इस अभियान में अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सोमवार को उच्चस्तरीय बैठक में इन सुधारों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को शेष सुधारों को निर्धारित समय-सीमा में लागू करने और उनकी प्रगति से जुड़े दस्तावेजी साक्ष्य समय पर एमआईएस पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार ऐसा नियामक ढांचा विकसित करना चाहती है जो पारदर्शी, तकनीक आधारित और उद्योगों के अनुकूल हो। इससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा, उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा और प्रदेश में कारोबार करना और आसान होगा।

बिजली कनेक्शन से लेकर पर्यावरण मंजूरी तक नियम आसान

केंद्र सरकार के डी-रेग्यूलेशन सेल द्वारा छह प्रमुख सुधारों को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें—

  • बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया को सरल और तेज बनाना
  • दुकानों एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के नियमों में उदारीकरण
  • सिंगल विंडो के जरिए सेवाओं की समयबद्ध उपलब्धता
  • हरियाणा सेवा का अधिकार व्यवस्था में ऑटो-अपील प्रणाली
  • पर्यावरणीय स्वीकृतियों की प्रक्रिया में सुधार
  • एमएसएमई के लिए निरीक्षण सुविधाओं तक बेहतर पहुंच
    शामिल हैं।

इसके अलावा भूमि उपयोग नियमों में उदारीकरण, औद्योगिक प्लॉटों के प्रबंधन में लचीलापन, भवन निर्माण स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाना, वैश्विक मानकों के अनुरूप अग्नि सुरक्षा नियम, स्वास्थ्य क्षेत्र में लाइसेंस प्रक्रिया को आसान बनाना और राज्य के कानूनों एवं नियमों का डिजिटलीकरण जैसे सुधारों पर भी काम तेजी से चल रहा है।

उद्योगों को प्लॉट विभाजन और एकीकरण की सुविधा

एचएसआईआईडीसी की ओर से उद्योगों की सुविधा के लिए औद्योगिक भूखंडों के विभाजन और एकीकरण, पूर्व अनुमति के बिना औद्योगिक परियोजनाओं में बदलाव की सुविधा, 10 वर्ष बाद लीजहोल्ड को फ्रीहोल्ड में बदलने की व्यवस्था, लचीले लीज नियम और भूमि के बेहतर उपयोग के लिए उदार विकास नियम लागू किए जा रहे हैं।

‘राइट टू बिजनेस’ विधेयक का ड्राफ्ट तैयार

उद्योग एवं वाणिज्य विभाग ने हरियाणा राइट टू बिजनेस विधेयक, 2026 का प्रारूप तैयार कर लिया है। प्रस्तावित विधेयक के तहत पात्र विनिर्माण एमएसएमई इकाइयों को स्व-घोषणा के आधार पर सैद्धांतिक स्वीकृति प्रमाण-पत्र देने और राज्य सरकार के विभागों के निरीक्षण से तीन वर्ष तक की छूट का प्रावधान किया गया है।
हरियाणा एंटरप्राइजेज प्रमोशन सेंटर (HEPC) को राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी बनाया जाएगा, जबकि जिला स्तरीय स्वीकृति समितियां सिंगल विंडो प्रणाली के माध्यम से समयबद्ध मंजूरी सुनिश्चित करेंगी।

70 प्रतिशत क्षेत्र में CLU की जरूरत नहीं

नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के अनुसार प्रदेश के लगभग 70 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र, जो नियंत्रित क्षेत्रों से बाहर है, वहां कृषि भूमि को गैर-कृषि उपयोग में बदलने के लिए भूमि उपयोग परिवर्तन (CLU) की अनुमति की आवश्यकता नहीं है।
वहीं नियंत्रित क्षेत्रों में भी बिना मानवीय हस्तक्षेप के सिस्टम जनरेटेड CLU स्वीकृति की दिशा में काम किया जा रहा है।

सरकार के अनुसार इन सुधारों का उद्देश्य प्रदेश में कारोबारी प्रक्रियाओं को सरल बनाना, अनावश्यक अनुपालनों को कम करना और निवेशकों को तेज, पारदर्शी एवं तकनीक आधारित सेवाएं उपलब्ध कराना है।