अमित पाण्डेय, डोंगरगढ़. कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर डोंगरगढ़ में आयोजित गोविंदा उत्सव इस बार एक अलग वजह से चर्चा में रहा. करीब 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की मौजूदगी और देर रात तक चले आयोजन के बावजूद कोई अप्रिय घटना नहीं हुई. पुलिस की सख्त और पूर्व नियोजित व्यवस्था के चलते गोविंदा उत्सव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ. डोंगरगढ़ में पहली बार गोविंदा उत्सव को इस तरह ‘जीरो-इंसिडेंट’ के रूप में पूरा किया जाना पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है. पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के निर्देश पर इस बार पुलिस ने घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय घटना होने से पहले उसे रोकने की रणनीति अपनाई. आयोजन से करीब एक सप्ताह पहले ही सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन की तैयारी शुरू कर दी गई थी. आयोजन समिति, डीजे और साउंड संचालकों सहित संबंधित लोगों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए. इसके बाद प्रमुख चौक-चौराहों, शोभायात्रा मार्ग और कार्यक्रम स्थलों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया.
सबसे अहम बात यह रही कि पुलिस की अलग-अलग टीमें लगातार भीड़ के बीच सक्रिय रहीं. संदिग्ध और असामाजिक तत्वों पर पहले से नजर रखी गई और संभावित वारदात को अंजाम देने से पहले ही कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई. पुलिस की इस प्रिवेंटिव पुलिसिंग का असर पूरे आयोजन में दिखाई दिया. भीड़ के बीच तलाशी और निगरानी के दौरान पुलिस ने करीब दो बड़े बोरों में कड़े जब्त किए. इसके अलावा कई धारदार हथियार भी बरामद किए गए. पुलिस की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया कि उत्सव की आड़ में उपद्रव या हिंसा की कोशिश करने वालों के लिए कोई जगह नहीं थी.

गोविंदा उत्सव से पहले अवैध शराब के कारोबार पर भी पुलिस ने शिकंजा कसा. लगातार निगरानी और कार्रवाई के चलते शराब कोचियों में पुलिस का खौफ नजर आया और उत्सव के दौरान अवैध शराब की बिक्री पर प्रभावी तरीके से अंकुश रहा. पुलिस की सख्ती के कारण शराब के जरिए विवाद या हुड़दंग की आशंका भी काफी हद तक खत्म रही. पुलिस की इस रणनीति का सीधा असर आयोजन के माहौल पर पड़ा और श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्ण वातावरण में उत्सव का आनंद लिया. पूरे आयोजन के लिए 300 से अधिक पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी.

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर, एसडीओपी केसरी नंदन नायक, नगर पुलिस अधीक्षक वैशाली जैन, डीएसपी एंब्रोस कुजूर, केके बाजपेयी, सतानंद विंध्यराज और डीएसपी सुमन जायसवाल सहित जिले के विभिन्न थाना और चौकी प्रभारी लगातार मैदान में मौजूद रहे. पुलिसकर्मियों ने शोभायात्रा मार्ग, प्रमुख चौक-चौराहों और कार्यक्रम स्थलों पर लगातार निगरानी रखते हुए भीड़ तथा यातायात को नियंत्रित किया.

इस पूरे आयोजन में एसपी अंकिता शर्मा और डोंगरगढ़ की महिला पुलिस अधिकारी प्रशिक्षु डीएसपी सुमन जायसवाल की मैदानी निगरानी भी खास तौर पर नजर आई. महिला अधिकारियों के नेतृत्व में पुलिस टीमों ने भीड़ के बीच सक्रिय रहकर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी. पुलिस की रणनीति का मूल मंत्र साफ था, वारदात का इंतजार नहीं, बल्कि वारदात की संभावना को ही खत्म करना.

डोंगरगढ़ धार्मिक और पर्यटन महत्व का शहर है, जहां गोविंदा उत्सव के दौरान आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं. ऐसे में हजारों लोगों की भीड़ के बीच कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती होती है. इस बार पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को केवल बल तैनाती तक सीमित नहीं रखा, बल्कि पूर्व तैयारी, संदिग्धों की निगरानी, हथियारों की जब्ती, अवैध शराब पर नियंत्रण और लगातार मैदानी पुलिसिंग के जरिए संभावित विवादों को पहले ही रोकने पर जोर दिया. नतीजा यह रहा कि 50 हजार से अधिक लोगों की भीड़, कई स्थानों पर एक साथ कार्यक्रम, शोभायात्रा और देर रात तक चले उत्सव के बावजूद कोई बड़ी अप्रिय घटना सामने नहीं आई.

पुलिस के लिए यह सिर्फ एक सफल आयोजन नहीं, बल्कि डोंगरगढ़ में अपराध और उपद्रव के खिलाफ अपनाई गई ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के असर का उदाहरण भी बन गया.
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