० पत्नी के साथ विदेश यात्रा पर गए थे, समुद्र के बीच क्रूज पर थमी सांसें; 20 हजार से अधिक पोलियो ऑपरेशन कर हजारों मरीजों को दी नई जिंदगी
डूंगरपुर। राजस्थान के डूंगरपुर के वरिष्ठ आर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. अनिल बनवीर (75) का अमेरिका से मेक्सिको के बीच क्रूज यात्रा के दौरान निधन हो गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, समुद्र के बीच अचानक हार्ट अटैक आने से उनकी मौत हो गई। घटना के समय उनकी पत्नी डॉ. निशा बनवीर भी उनके साथ मौजूद थीं।
क्रूज पर बिगड़ी तबीयत, डॉक्टरों ने मृत घोषित किया
डॉ. अनिल बनवीर और उनकी पत्नी 9 जुलाई को विदेश यात्रा पर गए थे। मंगलवार को दोनों अमेरिका से मेक्सिको के लिए क्रूज से सफर कर रहे थे। यात्रा के दौरान अचानक उनकी हृदय गति रुक गई। क्रूज पर मौजूद डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
डूंगरपुर में शोक की लहर
डॉ. बनवीर के निधन की खबर मिलते ही डूंगरपुर सहित पूरे चिकित्सा जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उन्होंने वर्षों तक डूंगरपुर जिला अस्पताल और सागवाड़ा अस्पताल में अपनी सेवाएं दीं। वे प्रमुख चिकित्सा अधिकारी के पद पर भी रहे। करीब 13 वर्ष पहले सेवानिवृत्त होने के बाद भी वे एक निजी अस्पताल में मरीजों का इलाज कर रहे थे।
20 हजार से अधिक पोलियो ऑपरेशन कर बदली हजारों जिंदगियां
डॉ. अनिल बनवीर को पोलियो करेक्शन सर्जरी के क्षेत्र में विशेष पहचान हासिल थी। उन्होंने अपने चिकित्सा जीवन में 20 हजार से अधिक पोलियो करेक्शन ऑपरेशन किए, जिससे हजारों दिव्यांग मरीजों को फिर से चलने-फिरने का अवसर मिला।
वे केवल एक कुशल चिकित्सक ही नहीं, बल्कि समाजसेवी भी थे। नारायण सेवा संस्थान और महावीर इंटरनेशनल जैसी संस्थाओं से जुड़कर उन्होंने चिकित्सा सेवा और सामाजिक कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
बेटा-बहू और बेटी विदेश में
डॉ. बनवीर के पुत्र डॉ. सौमित्र बनवीर और बहू डॉ. उपासना बनवीर लंदन में चिकित्सक हैं, जबकि उनकी बेटी शौकिता ठाकुर अपने पति के साथ कनाडा में रहती हैं। परिवार के सभी सदस्य विदेश में होने के कारण अंतिम संस्कार को लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
चिकित्सा जगत ने दी श्रद्धांजलि
डूंगरपुर जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. कांतिलाल मेघवाल सहित कई चिकित्सकों और सामाजिक संगठनों ने डॉ. अनिल बनवीर के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। भारत विकास परिषद तिलक शाखा समेत विभिन्न संगठनों ने उनके योगदान को याद करते हुए इसे चिकित्सा जगत की अपूरणीय क्षति बताया।

