लखनऊ. राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हथकरघा और हस्तशिल्प उद्योग की उपलब्धियां गिनाने के साथ-साथ पूर्ववर्ती सरकारों पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में परिवारवाद, भाई-भतीजावाद और वोट बैंक की राजनीति के कारण बुनकरों, हस्तशिल्पियों और कारीगरों की लगातार उपेक्षा हुई. बिजली की कमी, खराब कानून व्यवस्था और सरकारी उदासीनता ने प्रदेश के पारंपरिक उद्योगों को लगभग दम तोड़ने की स्थिति में पहुंचा दिया था.

मुख्यमंत्री ने कहा कि हथकरघा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि भारत के स्वाधीनता आंदोलन और स्वदेशी की पहचान है. इसके बावजूद पिछली सरकारों ने इस क्षेत्र के विकास के लिए कोई ठोस दृष्टि नहीं दिखाई. उन्होंने कहा कि जिन लोगों के लिए सत्ता का मतलब केवल परिवार और वोट बैंक था, उन्हें गरीब बुनकरों, कारीगरों और महिलाओं की आजीविका की कोई चिंता नहीं थी. योगी आदित्यनाथ ने बिना नाम लिए समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में दंगे आम बात थे, महीनों तक कर्फ्यू लगा रहता था, व्यापारी असुरक्षित थे और कारीगर भय के माहौल में काम करते थे. उन्होंने कहा कि हथकरघा क्षेत्र में 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं कार्य करती हैं, लेकिन उस समय न महिलाएं सुरक्षित थीं और न ही उद्योग.

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मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में विपक्ष पर व्यक्तिगत कटाक्ष भी किया. उन्होंने कहा कि “कुछ लोग जीवनभर ‘बबुआ’ ही बने रहते हैं. देर से उठते थे, जिम जाते थे और शाम को महफिल सज जाती थी. ऐसे लोगों के पास प्रदेश के विकास के बारे में सोचने का समय ही नहीं था.” उन्होंने कहा कि इसी वजह से बुनियादी शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और रोजगार जैसे क्षेत्र उपेक्षित रहे. योगी ने कहा कि उनकी सरकार ने सत्ता में आने के बाद पारंपरिक उद्योगों को पुनर्जीवित करने का अभियान शुरू किया. वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना के माध्यम से प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों की ब्रांडिंग की गई, उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ा गया और आधुनिक डिजाइन, पैकेजिंग तथा तकनीक उपलब्ध कराई गई.

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश में करीब ढाई लाख परिवार सीधे हथकरघा उद्योग से जुड़े हैं. पावरलूम क्षेत्र को जोड़ने पर यह संख्या 30 लाख से अधिक लोगों की आजीविका का आधार बनती है. उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष 40 हजार से अधिक बुनकरों को 109 करोड़ रुपये की बिजली सब्सिडी दी गई. इसके अलावा एमएसएमई इकाइयों को पांच लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा कवर, विश्वकर्मा श्रम सम्मान और पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत प्रशिक्षण व आधुनिक टूलकिट उपलब्ध कराई जा रही है. उन्होंने कहा कि भदोही की कालीन, वाराणसी की सिल्क, लखनऊ की चिकनकारी, मुरादाबाद का पीतल, मेरठ के खेल उत्पाद, फिरोजाबाद का कांच और अन्य पारंपरिक उत्पाद आज वैश्विक पहचान बना रहे हैं.

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योगी ने कहा कि नई संसद भवन में भदोही की कालीन का इस्तेमाल इसका बड़ा उदाहरण है. वाराणसी में ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर, भदोही में कार्पेट एक्सपो सेंटर और लखनऊ में पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क जैसी परियोजनाएं इस क्षेत्र को नई गति देंगी. मुख्यमंत्री ने सरकारी विभागों से अस्पतालों, अतिथि गृहों और अन्य संस्थानों में उत्तर प्रदेश के हथकरघा और पावरलूम उत्पादों की खरीद को प्राथमिकता देने का भी निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि इससे बुनकरों की आय बढ़ेगी और प्रदेश के उत्पादों को स्थायी बाजार मिलेगा.

अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि हथकरघा भारत की विरासत, स्वदेशी आंदोलन की पहचान और आत्मनिर्भर भारत का मजबूत आधार है. सरकार बुनकरों और कारीगरों के हितों की रक्षा, उनके कौशल के विकास और उनके उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करती रहेगी. कार्यक्रम के दौरान हथकरघा एवं वस्त्र क्षेत्र से जुड़े कई एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले बुनकरों और हस्तशिल्पियों को सम्मानित किया गया.