लखनऊ. सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर एक बार फिर हमला बोला है. पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया के जरिए सपा प्रमुख को घेर रहे राजभर ने शुक्रवार को गाजीपुर में 13 वर्षीय बच्ची और अमेठी में कश्यप समाज के युवक की हत्या के मामले को लेकर सपा पर निशाना साधा.
राजभर ने लिखा कि अखिलेश यादव भगवान श्रीकृष्ण के वंशज नहीं हो सकते, बल्कि कंसवंशी हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव में सपा के 37 सीटें जीतने के बाद सपा के लोग पागल हो गए हैं और पीडीए के नाम पर ढोंग रच रहे हैं. राजभर ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में अखिलेश यादव पर कई गंभीर आरोप लगाए और कहा कि पीडीए के नाम पर राजनीति करने वाली सपा को इन घटनाओं पर जवाब देना चाहिए.
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सोशल मीडिया पोस्ट में राजभर ने की तीखी टिप्पणी
ओमप्रकाश राजभर ने X पर लिखा कि अखिलेश यादव को इन घटनाओं पर अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि गाजीपुर में राजभर समाज की बच्चियों के साथ अन्याय हुआ और अमेठी में कश्यप समाज के युवक की हत्या का मामला भी गंभीर है. राजभर ने सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं पर आरोप लगाते हुए कहा कि कमजोर और पिछड़े वर्गों के साथ होने वाली घटनाओं पर भी समान रूप से आवाज उठानी चाहिए.
पीडीए का ढोंग और कंसवंशी आरोप
राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि पीडीए के नाम पर रोज नई नौटंकी रची जा रही है, लेकिन हत्यारे अहिर गुंडे सरेआम सक्रिय हैं. उन्होंने यादव समुदाय को चेतावनी दी कि उनकी दुश्मनी ओमप्रकाश राजभर से है और वगह लखनऊ के 20 गौतमपल्ली में रहते हैं. आगे कहा कि मासूमों को मारकर वीर बनने वाले निर्दयी होते हैं.
पीडीए राजनीति पर उठाए सवाल
सुभासपा प्रमुख ने अखिलेश यादव की पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) राजनीति पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि अगर पीडीए की बात की जाती है तो पिछड़े और अति पिछड़े समाज के पीड़ित परिवारों को भी न्याय दिलाने की मांग होनी चाहिए. राजभर ने अपने पोस्ट में कई पिछड़ा और वंचित समाजों का जिक्र करते हुए एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की.
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राजभर के बयान पर सियासी हलचल तेज
ओमप्रकाश राजभर और अखिलेश यादव के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज हो रही है. राजभर पहले भी सपा प्रमुख पर परिवारवाद, पिछड़े वर्गों और कानून व्यवस्था के मुद्दों को लेकर हमला करते रहे हैं. गाजीपुर और अमेठी की घटनाओं को लेकर दिए गए राजभर के बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी बहस शुरू हो गई है.


