अनमोल मिश्रा, सतना। जाति प्रमाण पत्र को लेकर सवालों के घेरे में फंसी नगरीय विकास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी की जाति की जांच की प्रक्रिया तेज हो गई है। राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति के निर्देश पर नागौद तहसील के ग्राम वसुधा और हरदुआ मझोल समेत संबंधित क्षेत्रों में डुगडुगी बजवाई गई। इस दौरान प्रशासन के लोगों ने गांव वालों से प्रतिमा बागरी से जुड़े सबूत या कागज राज्य स्तरीय छानबीन के सामने पेश करने की अपील की।
राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी को 6 जुलाई तक अनुसूचित जाति विकास आयुक्त कार्यालय में मौजूद होना होगा। साथ ही अपना पक्ष रखना होगा। इसे लेकर राज्य स्तरीय छानबीन समिति उन्हें नोटिस जारी कर चुकी है। इसकी तामील सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सतना कलेक्टर को दी गई है।
छानबीन समिति ने मंत्री को भेजे नोटिस में साफ कहा है कि उन्हें वर्ष 1950 की स्थिति के अनुसार जिला-सतना का मूल निवासी होने और स्वयं को ‘बागरी’ अनुसूचित जाति का होने से जुड़े पुख्ता सबूत पेश करने होंगे। सबूत के तौर पर उन्हें ऐसे मूल दस्तावेज और ऐतिहासिक साक्ष्य दिखाने होंगे जो यह प्रमाणित कर सकें कि उनका परिवार 1950 के पहले से सतना जिले में रह रहा है और वे बागरी जाति के ही अंतर्गत आते हैं।
प्रतिमा बागरी की जाति से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए इश्तहार की प्रतियां तहसील कार्यालय नागौद, जनपद पंचायत कार्यालय और संबंधित ग्राम पंचायतों के नोटिस बोर्ड पर भी चस्पा कराई गई है।
क्यों गहराया विवाद?
प्रतिमा बागरी सतना जिले की रैगांव विधानसभा जो SC सीट है से विधायक चुनी गई हैं और वर्तमान में सूबे की सरकार में राज्यमंत्री हैं। यदि 6 जुलाई को होने वाली इस बड़ी पेशी में मंत्री बागरी समिति के सामने 1950 के समय के वैध दस्तावेज और प्रमाण पेश नहीं कर पाती हैं तो उनका अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र निरस्त हो सकता है। ऐसे में न सिर्फ उनकी मंत्री पद की कुर्सी जाएगी बल्कि उनकी विधायकी पर भी बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
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