दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। नर्मदापुरम। जिले में कानून-व्यवस्था और सरकारी दावों की धज्जियां उड़ाते हुए रेत माफिया और भारी वाहन चालक न सिर्फ पुलों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं, बल्कि राहगीरों की जान भी जोखिम में डाल रहे हैं। एक तरफ नर्मदापुरम, पिपरिया और पचमढ़ी को जोड़ने वाला 44 साल पुराना ऐतिहासिक तवा पुल जर्जर होकर तड़प रहा है, तो दूसरी तरफ जीवनदायिनी नर्मदा के सीने को दिन-दहाड़े छलनी किया जा रहा है।

​जर्जर तवापुल पर रात का ‘खूनी खेल’

तवा पुल के पिलर नंबर 52, 53 और 54 के स्लैब जॉइंट्स में गंभीर दरारें आने के बाद प्रशासन ने दो महीने से भारी वाहनों पर रोक लगा रखी है। विशेषज्ञ इंजीनियरों की चेतावनी है कि पुल कभी भी बैठ सकता है। इसके बावजूद, रात के अंधेरे में होमगार्ड, पुलिस जवानों और इंटरनेट से जुड़े सीसीटीवी कैमरों की निगरानी को ठेंगा दिखाकर रेत से भरे ओवरलोड डंपर और ट्राले बेखौफ दौड़ रहे हैं। एमपीआरडीसी के डिवीजनल मैनेजर अनिरुद्ध बंसल के मुताबिक, स्थिति इतनी गंभीर है कि अब भारी वाहनों को रोकने के लिए मजबूत ‘हाइट गेज’ का डिजाइन तैयार किया जा रहा है, क्योंकि पिछले सामान्य हाइट गेज को दबंग वाहन चालकों ने तोड़ दिया था। प्रशासन ने माखननगर और सांगाखेड़ा की तरफ से जो संकरा वैकल्पिक मार्ग (डायवर्जन) दिया है, वह कीचड़ और ट्रैक्टरों की लंबी कतारों के कारण खुद एक बड़ी मुसीबत बन चुका है।

नर्मदा ब्रिज के पास दिन-दहाड़े डकैती

पुल की इस बदहाली के पीछे का मुख्य विलेन है- ‘अवैध रेत उत्खनन’। सरकारी रोक और नर्मदा का जलस्तर बढ़ने के बावजूद खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे रात तो क्या, दिन के उजाले में भी नर्मदा ब्रिज के ठीक नीचे से रेत चोरी कर रहे हैं। वर्तमान में डोंगरवाडा रेत खदान किसी को आवंटित नहीं है, यानी यहाँ से रेत निकालना पूरी तरह गैरकानूनी है। फिर भी, यहाँ से निकाली जा रही अवैध रेत को सीहोर जिले के बुदनी क्षेत्र में खपाया जा रहा है। जिला और थाना क्षेत्र अलग होने का फायदा उठाकर माफिया पुलिस को चकमा दे रहे हैं। साथ ही तवा पुल, चपलासर के साथ जिले मे कई रेत खदानों से रेत का बेख़ौफ़ उत्खनन किया जा रहा है।

​हाइवे बना ‘डेंजर ज़ोन’, ड्रेन होल हुए चोक

अवैध परिवहन के चलते भोपाल तिराहे से बुदनी के बीच बने नए टूलेन नर्मदा ब्रिज की हालत भी खराब हो रही है। ट्रैक्टरों से गिरने वाली रेत के कारण ब्रिज पर पानी निकासी के लिए बने ‘ड्रेन होल’ पूरी तरह बंद हो चुके हैं। नतीजा यह है कि पुल के करीब 5 फीट के हिस्से में कीचड़ और पानी जमा हो गया है, जिससे हाइवे पर वाहनों के फिसलने और बड़े हादसों की आशंका कई गुना बढ़ गई है। जनप्रतिनिधियों और बड़े अधिकारियों की गाड़ियों के सायरन भी इन माफियाओं के कानों पर जूं नहीं रेंग पा रहे हैं।

​अधिकारियों का दावा: सिर्फ कागजी कार्रवाई या होगी कड़ाई?

देवेंद्र प्रताप सिंह, एसडीएम नर्मदापुरम ने बताया कि”ब्रिज के पास से रेत का उत्खनन पूरी तरह गैरकानूनी है। हम तुरंत टीम भेजकर निरीक्षण कराएंगे और अवैध रेत का कारोबार करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”

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