भिलाईनगर। बीएसपी के नए एक्सपाशन प्रोजेक्ट के लिए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पर्यावरण मंजूरी दे दी है। इसके चलते अब प्रोडक्शन बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। नए एक्सपाशन प्रोजेक्ट से क्रूड स्टील का प्रोडक्शन 7.0 मिलियन टन से बढ़कर 8.3 मिलियन टन हो जाएगा।

यह भी पढ़ें : युक्तियुक्तकरण नीति पर हाईकोर्ट की मुहर, सरकार के निर्णय को ठहराया सही, शिक्षकों की सभी याचिकाएं खारिज

एक्सपांशन प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 47288 करोड़ है। बीएसपी के नए एक्सपांशन प्रोजेक्ट के तहत संयंत्र के विस्तार के लिए पर्यावरण विभाग ने एनओसी 28 जून की तारीख से जारी कर दी। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पर्यावरण मंजूरी की पूरी कॉपी, जिसमें सभी तय शर्तें और सुरक्षा उपाय शामिल हैं, उसे स्टील अथारिटी आफ इंडिया लिमिटेड की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिया है।

narayana

इसके अलावा बीएसपी मैनेजमेंट ने तत्संबंध में एक सार्वजनिक नोटिस भी जारी कर दिया है। पेड़ों की कटाई व आफिसों की शिफ्टिंग : मैनेजमेंट प्रोजेक्ट एरिया में आने वाले पेड़ों को बड़ी संख्या में वन विभाग से प्रक्रिया के तहत कटवा लिया है। जनसंपर्क विभाग, प्रोटोकाल सेक्शन, गैरेज, सेंट्रल रजिस्ट्री वगैरह को सेक्टर 1 में शिफ्ट कर दिया गया है। इसके अलावा कुछ अन्य विभागों को भी शिफ्ट किया जाना है।

एक्सपाशन प्रोजेक्ट इसलिए जरूरी : बीएसपी में नए एक्सपाशन प्रोजेक्ट को इसलिए जरूरी माना जा रहा है ताकि रेलवे की रेलपांत की बढ़ती मांग, रक्षा क्षेत्र के लिए नए ग्रेड के स्टील और निर्माण क्षेत्र की डिमांड को पूरा किया जा सके। भविष्य में नई रेल लाइनों का विस्तार होना तय है। ऐसे में रेलपाँत एक ऐसा प्रोडक्ट है जिसकी मांग लगातार बनी भी रहेगी और निरंतर बढ़ती जाएगी।

दुर्ग जिला बना नशे का बड़ा बाजार

भिलाईनगर। भिलाई शहर, जिसे पहले शिक्षाधानी के नाम से जाना जाता था, अब नशे के सौदागरों का बड़ा बाजार बन गया है। दुर्ग पुलिस ने तीन वर्ष और 5 माह में 377 प्रकरणों में कुल 750 आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया है। 9.69 करोड़ का नशे का सामान पकड़ा है। वहीं 63 नशे के सौदागरों को सजा भी दिलाई है।

डीआईजी व दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल ने बताया कि पुलिस मादक पदार्थों की तस्करी को रोकते हुए नशे के सौदागरों पर शिकंजा कसने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। अभियान के तहत वर्ष 2023 से मई 2026 तक नशे के सौदागरों को सलाखों के पीछे पहुंचाकर लगभग 9.69 करोड़ के नशे के मादक पदार्थों को जब्त किया गया है।

उन्होंने बताया कि नशे की सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार की है। मादक पदार्थ की तस्करी के मामले में दुर्ग पुलिस की कार्रवाई अच्छी खासी रही। एनडीपीएस एक्ट के तहत पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष गिरफ्तारियों की संख्या में भी वृद्धि हुई है।

पुलिस रिकार्ड में वर्ष 2023 से मई 2026 तक एनडीपीएस एक्ट के दर्ज मामलों में आंकड़े चौंकाने वाले है। तीन वर्ष और 5 माह में जिले के अलग-अलग थानों में कुल 377 मामले दर्ज है। इनमें करोड़ों रुपए की गांजा, हेरोइन, ब्राउन शुगर, डोडा, नशीली दवाइयां, अफीम व अफीम के पौधे बरामद हुए हैं। इतना ही नहीं बल्कि पुलिस हर दिन गांजा व अवैध शराब व अन्य नशे का सामान पकड़कर सौदागरों पर कार्रवाई कर रही है, लेकिन नशे का कारोबार कम होने का नाम नहीं ले रहा है।

सीएसवीटीयू ने साहित्यिक चोरी जांच शुल्क में किया संशोधन

भिलाईनगर। छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय भिलाई ने पीएचडी शोध कार्यों में गुणवत्ता और मौलिकता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए साहित्यिक चोरी (प्लेगरिज्म) जांच शुल्क में संशोधन किया है। तकनीकी विश्वविद्यालय भिलाई ने अन्य अधिकांश शुल्कों को यथावत रखते हुए केवल प्लेगरिज्म जांच शुल्क में वृद्धि की है।

सीएसवीटीयू ने कार्य परिषद की 101वीं बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार पीएचडी कार्यक्रम से संबंधित शुल्कों की संशोधित अधिसूचना जारी की है। जबकि पीएचडी प्रवेश परीक्षा शुल्क, पंजीयन शुल्क, कोर्स वर्क परीक्षा शुल्क, थीसिस जमा शुल्क, रिसर्च सेंटर मान्यता शुल्क सहित अधिकांश शुल्कों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, साहित्यिक चोरी (प्लेगरिज्म) जांच शुल्क में संशोधन किया गया है।

अब प्रथम प्रयास के लिए शुल्क 4000 रुपए द्वितीय प्रयास के लिए 5000 रुपए तथा तृतीय प्रयास के लिए 8000 रुपए निर्धारित किया गया है। इससे पहले यह शुल्क क्रमशः 2000, 3000 और 4000 रुपए था। तकनीकी विश्वविद्यालय भिलाई का मानना है कि शोध कार्यों में मौलिकता और अकादमिक ईमानदारी बनाए रखने के लिए प्लेगरिज्म जांच एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।

संशोधित शुल्क व्यवस्था से शोधार्थियों को उच्च गुणवत्ता एवं मौलिक शोध कार्य प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। अधिसूचना के अनुसार सुपरवाइजर परिवर्तन, थीसिस पुनः प्रस्तुत करने, अवधि विस्तार, पुनः पंजीयन तथा रिसर्च सेंटर की मान्यता से संबंधित शुल्क पूर्ववत रहेंगे।

दीपिका की मौत मामले की फिर से उठी जांच की मांग

दुर्ग। दीपिका की मौत मामले में गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट पर छत्तीसगढ़ कर्मचारी स्वास्थ्य संगठन ने सवाल खड़े कर दिए। संगठन के पदाधिकारी में मामले में एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया है। इन पदाधिकारियों का कहना है कि टीम में टेक्निकल एक्सपर्ट को होना चाहिए था, उसे ही मरीज को ब्लड देने की स्थिति का प्रोटोकॉल की समझ होती है। इस मामले में छोटे कर्मचारियों को दोषी ठहराया जाना कतई उचित नहीं है। मामले की निष्पक्ष तथा तकनीकी पहलुओं की जांच होनी चाहिए।

संगठन के उप प्रांताध्यक्ष प्रमेश पाल ने कहा कि जांच में पारदर्शिता नहीं अपनाई गई है। संभागीय अध्यक्ष अजय नायक ने कहा कि जिला अस्पताल लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल सुपेला और मेडिकल कॉलेज सहित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में विभिन्न घटनाओं में क्या तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी स्वास्थ्य कर्मचारी दोषी होता है ? प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों का कोई रोल नहीं होता है।

छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी इस पूरे मामले की मेडिकल कॉलेज और संचालक स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर से जांच करने की मांग के साथ बर्खास्त स्वास्थ्य कर्मचारी को सेवा में बहाल करने की मांग की है।

छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ जिला शाखा दुर्ग ने गुरुवार को भोजन अवकाश पर सेवा से बर्खास्त स्वास्थ्य कर्मचारी संविदा लैब टैक्नीशियन, संविदा स्टाफ नर्स एनएचएम को पुनः सेवा में बहाल करने सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक दुर्ग जिला चिकित्सालय और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के बाहर सांकेतिक नारेबाजी की। बर्खास्त स्वास्थ्य कर्मचारी को बहाल करने ध्यान आकर्षित कराया गया।

इन कर्मचारियों पर की गई कार्रवाई ब्लड बैंक के लैब टेक्नीशियन सुश्री निगार परवीन व सुश्री तरन्नुम जहां, एनएचएम के नर्सिंग ऑफिसर जागेश्वरी देवी तथा तनुजा वर्मा की सेवा की समाप्ति की कार्रवाई की गई है। वहीं अनास्तासिया केरकेट्टा स्टाफ नर्स, डॉ. निखिल अग्रवाल तथा डॉ. तृप्ति तिवारी पर कार्यवाही के लिए अनुशंसा की गई है।

करोड़ों की शासकीय भूमि पर पुलिसकर्मी का कब्जा

धमधा। धमधा विकासखंड के ग्राम धरमपुरा में स्थित खसरा नंबर 466 एवं 467 की करोड़ों रुपये मूल्य की शासकीय भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला अब नया मोड़ ले चुका है। राजस्व विभाग की जांच में वैशाली नगर भिलाई थाने में पदस्थ आरक्षक सुरेश यादव (पिता शत्रुघ्न यादव) द्वारा शासकीय भूमि पर कब्जा कर खेती किए जाने की पुष्टि होने का दावा किया गया है। जांच के बाद राजस्व विभाग ने अतिक्रमण का प्रकरण दर्ज कर आगे की कार्रवाई प्रारंभ कर दी है।

ग्रामीणों के अनुसार गांव की मुख्य सड़क से लगी शासकीय भूमि पर लंबे समय से कब्जा किया गया है। आरोप है कि पुलिस विभाग में पदस्थ होने के कारण सुरेश यादव का प्रभाव दिखाकर विरोध करने वालों को डराया धमकाया जाता रहा। ग्रामीणों का कहना है कि इसी भय के कारण अधिकांश लोग खुलकर शिकायत करने से बचते रहे। सूत्रों के अनुसार मामले की शिकायत अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), धमधा से की थी। इसके बाद पंचायत एवं पटवारी की संयुक्त जांच कराई गई।

जांच प्रतिवेदन में पंचायत द्वारा भूमि को शासकीय बताते हुए कब्जे की पुष्टि किए जाने की जानकारी सामने आई। तहसीलदार के निर्देश पर पटवारी द्वारा किए गए स्थल निरीक्षण में ग्राम धरमपुरा की शासकीय भूमि पर कब्जा पाए जाने के बाद राजस्व विभाग ने अतिक्रमण की कार्रवाई शुरू कर दी।

इधर, शिकायत के आधार पर उप पुलिस अधीक्षक, पुलिस लाइन दुर्ग द्वारा विभागीय जांच प्रारंभ कर दी गई है। शिकायतकर्ता का बयान दर्ज किया जा चुका है और मामले की विवेचना जारी है। राजस्व विभाग की कार्रवाई के बाद यह मामला पुलिस विभाग में चर्चा का विषय बन गया है।

खैरागढ़ के पांडुका गांव में 202 बोरी नकली डीएपी खाद जब्त

खैरागढ़। खरीफ सीजन के दौरान नकली खाद अवैध भंडारण और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए कृषि विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है। इसी कड़ी में खैरागढ़ विकासखंड के ग्राम पांडुका में छापेमारी कर 202 बोरी संदिग्ध डीएपी खाद जब्त की गई है। मामले को न्यायालय में प्रस्तुत कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम पांडुका निवासी राजेश वर्मा के गोदाम में महाराष्ट्र निर्मित 202 बोरी खाद रखी मिली, जिस पर डीएपी अंकित था। विभाग को सूचना मिली थी कि यह खाद किसानों को 1900 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से बेची जा रही है। सूचना के आधार पर टीम ने मौके पर पहुंचकर की है।

जांच के दौरान राजेश वर्मा ने खाद का स्वामित्व मनोज वर्मा का होना बताया, लेकिन खाद की खरीदी परिवहन और भंडारण से संबंधित कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। आवश्यक अभिलेख उपलब्ध नहीं होने पर कृषि विभाग ने पूरा स्टॉक जब्त कर लिया और प्रकरण न्यायालय में पेश कर दिया। कार्रवाई के दौरान सहायक संचालक कृषि लुकमान साहू, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी लखेश्वर तिवारी, देवेंद्र वर्मा और अश्विन पटौती मौजूद रहे।

लगातार मिल रही थी शिकायत

जिले में डीएपी खाद की किल्लत होने के बाद भी नकली डीएपी खाद की बिक्री की जाने की शिकायत लगातार मिल रही थी। जिला प्रशासन के निर्देश के बाद नकली खाद बिक्री किए जाने की शिकायत पर अभियान चलाया गया और यह सफलता मिली है।

ज्ञात हो कि जिले में यूरिया खाद से लेकर डीएपी पोटाश सहित अन्य खाद की सर्वाधिक मांग है। मांग के अनुसार समितियों में भी खाद का भंडारा नहीं होने के कारण किसानों को बाहर से भी खाद की खरीदी करनी पड़ रही है। ऐसे में दुकान विक्रेताओं द्वारा डीएपी के नकली खाद खपाएं जाने की शिकायत मिली थी जिस पर यह कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई से हड़कंप मचा हुआ है।

जीजा ने नाबालिग साली से दुष्कर्म कर वीडियो को किया वायरल

राजनांदगांव। नाबालिग साली के साथ दुष्कर्म कर सोशल मीडिया में वीडियो वायरल करने वाले आरोपी को छुरिया पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जानकारी के अनुसार, गत 1 जुलाई 2026 को प्राथी थाना आकर रिपोर्ट दर्ज कराया कि उनके दामाद तुषार त्यागी ने उनकी नाबालिग पुत्री के साथ 22 अप्रैल 2025 को शाम करीबन 5 बजे घर अंदर दुष्कर्म किया और जान से मारने की धमकी दिया है।

पीड़िता नाबालिग को आरोपी तुषार त्यागी द्वारा 28 फरवरी 2026 को बस से बिठाकर अपने साथ बिना अनुमति के दिल्ली लेजाकर 1 मार्च 2026 से 30 मार्च 2026 तक 7 से 8 बार उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाया है. एवं नाबालिग का अश्लील फोटो एवं वीडियो को यू-ट्यूब, फेसबुक, वाट्सप्प एंव इंस्टाग्राम में वायरल कर दिया है।

लिखित शिकायत पर पुलिस अपराध पंजीबध्द कर विवेचना में लिया गया। विवेचना दौरान आरोपी तुषार त्यागी को चंद घंटे में अभिरक्षा में लेकर पूछताछ करने पर अपनी छोटी साली नाबालिग पीडिता के साथ अपराध घटित करना स्वीकार करना पर गिरफतार कर आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया है।

जिला अस्पताल की नई जांच व्यवस्था ठप, 134 में सिर्फ 80 बीमारियों की हो रही जांच

राजनांदगांव। जिला अस्पताल के हमर क्लीनिक का संचालन हिन्दुस्तान लाइफ केयर द्वारा किया जा रहा है। पहले इसका संचालन जिला अस्पताल द्वारा किया जा रहा था। लेकिन विगत मई माह से केन्द्र की साझेदारी वाली कंपनी को संचालन का जिम्मा दिया गया है। लेकिन इसके बाद भी जरूरी बीमारियों के टेस्ट की सुविधा नही मिल पा रही है।

जिला अस्पताल के हमर क्लीनिक में भी सवा सौ से अधिक बीमारियों के टेस्ट की सुविधा का दावा किया गया था। लेकिन लंबे समय से रिएजेंट नही होने के चलते यहां जरूरी बीमारियों का टेस्ट नही हो पा रहा था। हाल ही में इसका संचालन एचएलएल को दिए जाने के बाद उम्मीद थी कि, सभी तरह की बीमारियों का टेस्ट हो पाएगा। इसके संचालन के पहले ही जिला अस्पताल प्रबंधन ने 120 बीमारियों के टेस्ट का दावा किया था। लेकिन वर्तमान में किए गए पड़ताल में पाया गया कि, अस्पताल में सिर्फ 80 बीमारियों का ही टेस्ट हो रहा है। जिसमें सीबीसी, एचबी, शुगर जैसे बीमारी शामिल है। जबकि किडनी के टेस्ट का इलाज शुरू नही किया गया है।

रिएजेंट की अभी भी सप्लाई नहीं

जानकारी के अनुसार, जिला अस्पताल में पिछले लंबे समय से लीवर, सुगर, संक्रमण से संबंधित बीमारियों की जांच रिएजेंट के चलते नहीं हो पा रही है। पिछले दिनों लाखों रूपए खर्च कर हमर लैब भी खोला गया। जिसमें सवा सौ से अधिक जाच किए जाने का दावा किया गया था, लेकिन यहां आवश्यक बीमारियों का टेस्ट ही नही हो रहा है। जिसमें ब्लड सुगर, लीवर फंक्शन, किडनी फंक्शन व यूरिक एसिड, यूरिन, सीबीसी, आरबीसी व व्हीबीसीसी जैसे जांच नही हो पा रहे है, इन सभी में रिएजेंट की जरूरत होती है। पता चला है कि इसके लिए निजी कंपनी भी रिएजेंट की व्यवस्था नही कर पा रही है।

अभी भी बाहर से टेस्ट कराने की मजबूर

ओपीडी में आए मरीजों को निजी क्लिीनिक में महंगे दाम पर टेस्ट कराना पड़ रहा है। अफसरों का दावा है कि एचएलएल कंपनी द्वारा सभी जरूरी बीमारियों की जाएगी। आधुनिक मशीन का उपयोग कंपनी अलग से करेगी। लेकिन यह दावा खोखला साबित हो रहा हैं। लंबे समय से रिएजेंट केमिकल की सप्लाई नहीं की जा रही है। जिसके चलते जिला अस्पताल में आवश्यक बीमारियों का टेस्ट नहीं हो पा रहा है।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m