कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़: हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। दुष्यंत चौटाला ने 27 अप्रैल को प्रस्तावित महापंचायत को लेकर अपने पैतृक गांव चौटाला में पहुंचकर माहौल गरमा दिया। देर शाम गांव में पहुंचे दुष्यंत ने ग्रामीणों से खुलकर समर्थन मांगा और भरोसा जताया कि चौटाला गांव हमेशा की तरह इस बार भी “न्याय” के साथ खड़ा होगा।

दुष्यंत चौटाला ने अपने संबोधन में भावनात्मक कार्ड खेलते हुए इस मुद्दे को “पगड़ी की लड़ाई” करार दिया। उन्होंने कहा कि चौटाला गांव की पहचान हमेशा सम्मान और न्याय से रही है, और यहां के लोग कभी अन्याय सहने वाले नहीं रहे। इसी भरोसे के साथ उन्होंने 27 अप्रैल को हिसार में होने वाली महापंचायत में ज्यादा से ज्यादा लोगों के पहुंचने की अपील की।

उन्होंने साफ किया कि वे अपने गांव भाषण देने नहीं, बल्कि “न्याय मांगने” आए हैं। उनका कहना था कि यह लड़ाई उनके लिए व्यक्तिगत नहीं बल्कि उन “बेकसूर छात्रों” के लिए है, जिनके साथ कथित तौर पर अन्याय हुआ है। इस दौरान उन्होंने पूरे मामले को “बड़ी साजिश” करार देते हुए इशारों-इशारों में बड़े लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए।

घटना का जिक्र करते हुए दुष्यंत ने बताया कि वे छात्र हितों की मांग को लेकर वीसी (Vice Chancellor – कुलपति) से मिलने गए थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें गेट पर ही रोक दिया। उनके मुताबिक इस दौरान सिर्फ दो गमले टूटे, लेकिन इसके बावजूद गंभीर धाराएं लगा दी गईं, जो अपने आप में सवाल खड़े करती हैं।

उन्होंने पुलिस कार्रवाई पर भी तीखा हमला बोला। दुष्यंत का आरोप है कि उनके कार्यकर्ताओं को आधी रात में घरों से उठाया गया और इस दौरान पुलिस ने बिना महिला स्टाफ के सिविल ड्रेस में घरों में घुसकर महिलाओं के साथ बदसलूकी की।

इस दौरान दुष्यंत चौटाला ने आत्ममंथन भी किया। उन्होंने किसान आंदोलन के समय हुई अपनी “गलतियों” को स्वीकारते हुए कहा कि जनता ने उन्हें चुनाव में सजा भी दी, लेकिन अब वे छात्रों के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं और पीछे हटने वाले नहीं हैं।

अब नजरें 27 अप्रैल की हिसार महापंचायत पर टिकी हैं, जहां यह देखना दिलचस्प होगा कि यह “पगड़ी की लड़ाई” कितनी बड़ी सियासी ताकत में बदलती है।