कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हिसार में गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय (GJU) से जुड़े विवाद को लेकर दुष्यंत चौटाला ने हरियाणा सरकार पर तीखा हमला बोला है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार असली कसूरवारों को बचाने में लगी है और छात्रों की असली लड़ाई से ध्यान भटकाने के लिए प्रोपगंडा रचा जा रहा है। उन्होंने बिना नाम लिए आरएसएस की विचारधारा पर निशाना साधते हुए कहा कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन छात्रों को एक विशेष आइडियोलॉजी से जोड़ने का प्रयास कर रहा है, जबकि अन्य छात्र संगठनों को कैंपस में कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं दी जाती।

दुष्यंत चौटाला ने साफ कहा कि उनकी लड़ाई विचारधारा के खिलाफ नहीं, बल्कि समान अवसर के लिए है। उनका कहना है कि या तो सभी प्रकार के सेमिनार पर प्रतिबंध लगाया जाए, या फिर किसी एक विचारधारा को बढ़ावा देने की प्रक्रिया बंद होनी चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने 27 अप्रैल को हिसार के क्रांतिमान पार्क में महापंचायत बुलाने का ऐलान किया है, जिसमें पूरे देश से बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने का दावा किया गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे मामले में रोज नए खुलासे हो रहे हैं और अब यह स्पष्ट हो रहा है कि घटनाक्रम एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था। पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई करने वाले अधिकारियों ने खुद को क्लीन चिट दे दी, जबकि उनकी शिकायत पर अब तक FIR दर्ज नहीं हुई।

उन्होंने एक डीएसपी पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह गिरफ्तारी के दौरान सिविल ड्रेस में मौजूद था ओर फिर खुद ही अपने पूरे स्टॉफ को क्लिन चिट दे रहा था।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर निशाना साधते हुए दुष्यंत चौटाला ने कहा कि सरकार आरोपियों को बचाने और उनके खिलाफ कार्रवाई करवाने का माहौल बना रही है। उन्होंने बताया कि कोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार कर ली है और एसपी से एफिडेविट मांगा गया है, जबकि अगली सुनवाई 30 अप्रैल को होगी।

दुष्यंत चौटाला ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि उस सिस्टम के खिलाफ है जिसमें पुलिस प्रशासन की भूमिका संदिग्ध रही है। उन्होंने दावा किया कि मामूली तोड़फोड़ के आरोप में छह लोगों को बंदूक के दम पर गिरफ्तार करना कई बड़े सवाल खड़े करता है, और समय आने पर पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।

साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस की ओर से उन्हें FIR की कॉपी तक समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसे उन्हें कोर्ट के जरिए हासिल करना पड़ा।