हेमंत शर्मा, इंदौर। करीब 66 करोड़ रुपये के बैंक लोन मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने रुचि ग्लोबल लिमिटेड के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। ED ने मामले में 21 आरोपियों और संस्थाओं के खिलाफ अभियोजन शिकायत विशेष PMLA कोर्ट, इंदौर में दाखिल की है। कोर्ट ने संबंधित आरोपियों और संस्थाओं को प्री-कॉग्निजेंस सुनवाई के लिए नोटिस जारी किए हैं। रुचि ग्लोबल अब Agrotrade Enterprises Ltd. के नाम से जानी जाती है। ED के मुताबिक इस मामले में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंकिंग सुविधाएं हासिल करने और रकम को अलग-अलग खातों के जरिए घुमाने की जांच की गई है।

कृषि उत्पादों की खरीद के नाम पर ली गई LC सुविधा

ED की जांच के मुताबिक, कंपनी ने कृषि उत्पादों की वास्तविक खरीद-बिक्री के नाम पर Letter of Credit यानी LC सुविधा हासिल की।आरोप है कि इन लेनदेन के पीछे वास्तविक व्यापारिक गतिविधि नहीं थी और कथित तौर पर फर्जी, तैयार किए गए और हेरफेर वाले दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।इसके बाद इन दस्तावेजों के आधार पर बैंकों से रकम डिस्काउंट कराई गई।बैंक से पैसा निकला… फिर घूमकर वापस कंपनी तक पहुंचा?जांच एजेंसी का दावा है कि बैंकिंग सिस्टम से हासिल रकम को सीधे कारोबार में लगाने के बजाय उसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया गया।

पैसों की आवाजाही का पैटर्न क्या था

ED के मुताबिक रकम को कई संबंधित संस्थाओं और खातों के बीच घुमाया गया और कथित तौर पर एक से तीन दिन के भीतर रकम वापस कंपनी से जुड़े खातों तक पहुंच जाती थी।यानी जांच का अहम बिंदु यही है कि जिन लेनदेन को वास्तविक कारोबारी गतिविधि के रूप में दिखाया गया, उनमें पैसों की आवाजाही का पैटर्न क्या था और आखिर रकम का वास्तविक इस्तेमाल कहां हुआ।

CBI की FIR से शुरू हुई ED की जांच

इस मामले में ED ने जांच CBI की FIR के आधार पर शुरू की थी।ED की फरवरी 2026 की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, CBI की FIR में रुचि ग्लोबल के खिलाफ बैंक कंसोर्टियम को कथित तौर पर 188.35 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान पहुंचाने के आरोपों की जांच की जा रही थी। ED ने कहा था कि कंपनी पर क्रेडिट सुविधाएं और LC कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हासिल करने तथा रकम को संबंधित कंपनियों के जरिए डायवर्ट और रूट करने के आरोपों की जांच हुई। यानी 66 करोड़ रुपये का मौजूदा अभियोजन मामला उस बड़े बैंक फ्रॉड जांच तंत्र का हिस्सा बताया जा रहा है।

23 दिसंबर 2025 को ED की छापेमारी

मामले में ED ने 23 दिसंबर 2025 को इंदौर और मुंबई में कई ठिकानों पर तलाशी कार्रवाई की थी।ED के मुताबिक तलाशी के दौरान 23 लाख रुपये से ज्यादा की नकदी और कई आपत्तिजनक दस्तावेज तथा डिजिटल डिवाइस बरामद किए गए थे। आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों से जुड़े 20 लाख रुपये से अधिक के बैंक बैलेंस फ्रीज किए जाने की जानकारी भी ED ने दी थी। जांच आगे बढ़ी तो ED ने 17 फरवरी 2026 को करीब 5.13 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच की।ED की आधिकारिक प्रेस रिलीज के मुताबिक यह संपत्ति नीता शाहरा के नाम पर दर्ज जमीन थी।

अब 21 आरोपी और संस्थाएं जांच के घेरे में

ताजा कार्रवाई के बाद मामले में 21 आरोपी व्यक्तियों और संस्थाओं को PMLA कोर्ट की प्रक्रिया का सामना करना होगा।अदालत द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अभियोजन शिकायत में ED ने किन दस्तावेजों, बैंकिंग ट्रेल और लेनदेन को आधार बनाया है और अदालत इस मामले में आगे क्या प्रक्रिया तय करती है।ED की जांच और आरोप अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं। आरोप साबित होना अदालत की अंतिम प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

कारोबारी गतिविधियां वास्तविक थीं या कागजों पर

नकली दस्तावेज से LC, बैंक से रकम और फिर खातों का जाल… ED अब पूरी ‘मनी ट्रेल’ तलाश रहीइस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि कृषि उत्पादों की खरीद के नाम पर दिखाई गई कारोबारी गतिविधियां वास्तविक थीं या कागजों पर बनाई गईं? बैंक से निकली रकम आखिर किन-किन खातों में गई और एक-दो दिन में वापस लौटने के पीछे क्या पैटर्न था? अब 21 आरोपियों और संस्थाओं को नोटिस के बाद यह मामला PMLA कोर्ट में दस्तावेजों और कथित मनी ट्रेल की जांच के अगले चरण में पहुंच गया है।

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