हेमंत शर्मा, इंदौर। शिक्षा के मंदिर की निगरानी का जिम्मा संभालने वाला एक सरकारी अधिकारी खुद भ्रष्टाचार के आरोपों में घिर गया। इंदौर में शासकीय स्कूल के संकुल प्रभारी राजकुमार चेलानी को लोकायुक्त पुलिस ने 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
READ MORE: ‘साहब… मैं जिंदा हूं!’ जिस बेटी की हत्या के आरोप में 22 दिन से जेल में थे पिता-भाई, वह अचानक लौट आई, पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
मिली जानकारी के अनुसार, एक निजी स्कूल द्वारा छात्र को टीसी (ट्रांसफर सर्टिफिकेट) नहीं दिए जाने की शिकायत की जांच के लिए राजकुमार चेलानी पहुंचे थे। आरोप है कि जांच के दौरान उन्होंने स्कूल संचालक पर कार्रवाई और उच्च अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाने का डर दिखाया। इसके बाद मामले को दबाने और अनुकूल रिपोर्ट देने के एवज में 10 हजार रुपए की रिश्वत की मांग कर डाली।
स्कूल संचालक रवि जायसवाल ने अधिकारी की मांग के आगे झुकने के बजाय लोकायुक्त कार्यालय का दरवाजा खटखटाया। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त ने पूरे मामले का सत्यापन कराया। शिकायत सही पाए जाने पर ट्रैप की योजना बनाई गई। तय रणनीति के तहत जैसे ही संयोगितागंज स्थित शासकीय स्कूल में आरोपी अधिकारी ने रिश्वत की रकम स्वीकार की, वैसे ही मौके पर मौजूद लोकायुक्त टीम ने उसे दबोच लिया। नोटों पर लगाए गए रासायनिक पाउडर के परीक्षण में भी रिश्वत लेने की पुष्टि हो गई।
READ MORE: HC की शरण मे परिवहन विभाग का करोड़पति पूर्व आरक्षक: सौरभ शर्मा ने दायर की जमानत याचिका, पत्नी के इलाज का दिया हवाला
जिस अधिकारी पर शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की जिम्मेदारी थी, वही अधिकारी कथित रूप से जांच को कमाई का जरिया बनाने में जुटा था। लोकायुक्त की इस कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी तंत्र में फैले भ्रष्टाचार पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी राजकुमार चेलानी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है। शिक्षा विभाग के गलियारों में अब इस बात की चर्चा है कि जांच के नाम पर वसूली का यह खेल कब से चल रहा था और क्या इस मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आएगी।

