रिजवान अंसारी, बुरहानपुर। मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने कानून, पुलिस तफ्तीश और पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जिस बेटी की ‘हत्या’ के आरोप में एक बेगुनाह पिता और भाई पिछले 22 दिनों से जेल की सलाखों के पीछे जिंदगी काट रहे हैं, वह बेटी अचानक जिंदा लौट आई है। युवती ने पुलिस के सामने पहुंचकर जब कहा, “साहब… मैं जिंदा हूं, मेरी हत्या नहीं हुई है…” तो अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
22 अप्रैल को हुई थी शिवानी लापता
पूरा मामला बुरहानपुर जिले के खकनार थाना क्षेत्र के ग्राम खड़की का है। यहां रहने वाली आदिवासी युवती शिवानी बीती 22 अप्रैल को अचानक लापता हो गई थी। परिजनों ने अपने स्तर पर उसकी काफी खोजबीन की, लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला तो 1 मई को खकनार थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई।
महाराष्ट्र पुलिस ने जली और सिरकटी लाश को बताया शिवानी
गुमशुदगी दर्ज होने के करीब 10 दिन बाद पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के जलगांव जामोद क्षेत्र में एक अज्ञात युवती की जली हुई और सिर कटी लाश बरामद हुई। शव की हालत इतनी बदतर थी कि उसकी शिनाख्त करना नामुमकिन था। जांच के दौरान महाराष्ट्र पुलिस बुरहानपुर के खकनार थाने पहुंची और वहां से लापता युवतियों का रिकॉर्ड खंगाला। बिना किसी पुख्ता फॉरेंसिक या डीएनए (DNA) जांच के, महाराष्ट्र पुलिस ने दावा कर दिया कि वह जली हुई लाश शिवानी की ही है। इसके बाद पुलिस ने शिवानी के पिता बापूराव और भाई अजय को हिरासत में ले लिया। पूछताछ के बाद दोनों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया और महाराष्ट्र की बुलढाणा जेल भेज दिया गया।
खुद थाने पहुंची ‘मृतक’ बेटी
जेल में बंद पिता और भाई पिछले 22 दिनों से बेगुनाही के आंसू रो रहे थे, तभी इस कहानी में एक फिल्मी मोड़ आया। दरअसल, शिवानी मरी नहीं थी, बल्कि वह गांव के ही अरुण नामक युवक के साथ भाग गई थी और दोनों ने प्रेम विवाह कर लिया था। लोक-लाज और डर के मारे दोनों गांव नहीं लौट रहे थे। इसी बीच शिवानी को सोशल मीडिया के जरिए पता चला कि पुलिस ने उसे मृत मान लिया है और उसकी ‘हत्या’ के आरोप में उसके पिता और भाई को जेल में भेज दिया है। यह खबर मिलते ही शिवानी के होश उड़ गए और वह तुरंत खकनार पुलिस के सामने हाजिर हो गई।
सिस्टम और पुलिस जांच पर खड़े हुए 5 बड़े सवाल
शिवानी के जिंदा सामने आने के बाद खकनार पुलिस ने उसे महिला थाने भेजा और तुरंत इसकी सूचना महाराष्ट्र की जलगांव जामोद पुलिस को दी। इस लापरवाही ने अब कई गंभीर सवालों को जन्म दे दिया है। बिना किसी पुख्ता वैज्ञानिक पहचान या डीएनए टेस्ट के पुलिस ने लाश को शिवानी कैसे मान लिया? एक बेगुनाह बाप और बेटे को बिना ठोस सबूत के 22 दिनों तक जेल में क्यों सड़ना पड़ा? आखिर जांच में इतनी बड़ी और अमानवीय चूक की जिम्मेदारी किसकी है? अगर शिवानी जिंदा है, तो महाराष्ट्र में मिली वह जली हुई और सिर कटी लाश आखिर किसकी थी?
पुलिसकर्मियों पर क्या कार्रवाई होगी
फिलहाल, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र दोनों राज्यों की पुलिस अपनी साख बचाने के लिए मामले की दोबारा जांच में जुट गई है। लेकिन अब जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस लचर सिस्टम के कारण बिना कसूर जेल की हवा खा रहे निर्दोष पिता-पुत्र को कब तक रिहा किया जाता है और लापरवाह पुलिसकर्मियों पर क्या कार्रवाई होती है।
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