Lifestyle Desk – देशभर में आज ईद-उल-अजहा यानी बकरीद पूरे उल्लास और आस्था के साथ मनाई जा रही है. सुबह से ही मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज अदा करने के लिए लोगों की भीड़ देखने को मिली. नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले मिलकर बकरीद की मुबारकबाद दी और अमन-चैन की दुआएं मांगी. बकरीद सिर्फ एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह त्याग, भरोसे और इंसानियत का संदेश देने वाला खास दिन माना जाता है.

कुर्बानी का असली मतलब

अक्सर लोग कुर्बानी को सिर्फ जानवर की बलि से जोड़कर देखते हैं, लेकिन इसका असली अर्थ इससे कहीं ज्यादा गहरा है. कुर्बानी का मतलब है, अल्लाह की राह में अपनी सबसे प्यारी चीज तक छोड़ देने का जज़्बा. यानी इंसान अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों के बारे में सोचे. इस पर्व के पीछे हजरत इब्राहीम की आस्था की कहानी जुड़ी है. कहा जाता है कि अल्लाह ने उनकी परीक्षा लेते हुए उनसे उनकी सबसे प्यारी चीज कुर्बान करने को कहा. इब्राहीम ने बिना हिचक अपने बेटे को कुर्बान करने का इरादा कर लिया, उनकी इसी सच्ची नीयत को देखकर अल्लाह ने बेटे की जगह एक जानवर की कुर्बानी स्वीकार कर ली.

जरूरतमंदों को भी मिले खुशी

बकरीद पर कुर्बानी के मांस को तीन हिस्सों में बांटने की परंपरा हैं, एक हिस्सा परिवार के लिए, जबकि बाकी गरीबों और जरूरतमंदों में बांटा जाता है, ताकि हर कोई इस त्योहार की खुशी में शामिल हो सके.

इंसानियत और जिम्मेदारी का पैगाम

इस्लाम में यह भी सिखाया गया है कि किसी भी इबादत से पहले अपनी जिम्मेदारियां पूरी करना जरूरी है. बकरीद हमें यही याद दिलाती है कि असली धर्म वही है, जिसमें इंसानियत और दूसरों की भलाई सबसे पहले आती हैं.