दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने मंगलवार को बारामूला से सांसद शेख अब्दुल राशिद (इंजीनियर राशिद)(Engineer Rashid ) को आतंकवाद फंडिंग मामले (Terrorism Funding Cases) में अंतरिम राहत देते हुए 25 जून से 30 जून तक जमानत मंजूर कर दी है। अदालत ने यह अनुमति उनके पिता के निधन के बाद होने वाले अंतिम संस्कार और धार्मिक रीति-रिवाजों में शामिल होने के लिए दी है। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह (Pratibha. M. Singh) और न्यायमूर्ति मधु जैन (Madhu Jain) की पीठ ने स्पष्ट किया कि 18 मई को दी गई अंतरिम जमानत (Interim Bail) की अवधि समाप्त होने के बाद सांसद को 2 जून को आत्मसमर्पण करना होगा।

इंजीनियर राशिद की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने अदालत से जमानत अवधि बढ़ाने की मांग की थी। उनका तर्क था कि सांसद को श्रीनगर में अपने पिता के दफन के 40वें दिन होने वाली धार्मिक रस्मों में शामिल होने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाए। हालांकि, अदालत ने मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सीमित राहत दी और निर्धारित तिथि तक आत्मसमर्पण करने का निर्देश बरकरार रखा। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि 18 मई को दी गई अंतरिम जमानत की अवधि समाप्त होने के बाद अपीलकर्ता को आत्मसमर्पण करना होगा। साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसे 25 जून से 30 जून तक पुनः अंतरिम जमानत दी जाएगी। इस अवधि के दौरान सांसद को अपने पिता के निधन के बाद होने वाले 40वें दिन के धार्मिक अनुष्ठानों और रस्मों में शामिल होने की अनुमति दी गई है। अंतरिम जमानत को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 25 जून से 30 जून तक की राहत पर भी वही शर्तें लागू रहेंगी जो पहले उनकी रिहाई के दौरान तय की गई थीं। इनमें सांसद के साथ हमेशा सादे कपड़ों में कम से कम 2 पुलिसकर्मी मौजूद रहेंगे, जो तिहाड़ जेल से श्रीनगर जाने और वापस लौटने तक उनकी निगरानी करेंगे।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें कब्रिस्तान या अन्य धार्मिक स्थलों पर जाने की अनुमति होगी, लेकिन अपने आवास के अलावा कहीं और जाने की अनुमति नहीं होगी। इससे पहले 28 अप्रैल को अदालत ने उन्हें अपने बीमार पिता से मिलने के लिए एक सप्ताह की अंतरिम जमानत दी थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 10 मई तक किया गया था, क्योंकि उनके पिता को इलाज के लिए दिल्ली स्थित AIIIMS में भर्ती कराना पड़ा था।

इंजीनियर राशिद आतंकवाद फंडिंग मामले में गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं। उन पर जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों और आतंकी संगठनों को फंडिंग देने के आरोप लगाए गए हैं। NIA ने उन्हें 2017 में दर्ज इस मामले में गिरफ्तार किया था। तब से वह 2019 से दिल्ली की तिहाड़ जेल (Tihad Jail) में बंद हैं। अक्टूबर 2019 में दायर चार्जशीट में उनका नाम शामिल किया गया था। इसके बाद विशेष NIA अदालत ने मार्च 2022 में उनके खिलाफ आरोप तय किए। अदालत द्वारा तय किए गए आरोपों में भारतीय दंड संहिता की धारा 120B (आपराधिक साजिश), 121 (सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना), 124A (देशद्रोह) के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की संबंधित धाराएं भी शामिल हैं।

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