Technology Desk, GUARD Act Chinese AI Robots Threat : दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स की दौड़ लगातार तेज हो रही है। इसी बीच चीन की तेजी से बढ़ती ह्यूमनॉइड (मानव जैसे) और चार पैरों वाले रोबोट बनाने की क्षमता ने अमेरिका की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका के रिपब्लिकन और डेमोक्रेट सांसदों ने मिलकर एक नया विधेयक ‘गार्ड एक्ट’ (GUARD Act) पेश किया है। इसका मकसद चीन में बने उन्नत रोबोट्स को अमेरिका के महत्वपूर्ण सरकारी और औद्योगिक ढांचे का हिस्सा बनने से रोकना है।
क्या है गार्ड एक्ट?
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की एनर्जी एंड कॉमर्स कमेटी की कम्युनिकेशंस एंड टेक्नोलॉजी सब-कमेटी में इस प्रस्ताव पर सुनवाई की गई। विधेयक का उद्देश्य ऐसे चीनी ह्यूमनॉइड और क्वाड्रुपेड (चार पैरों वाले) रोबोट्स के इस्तेमाल पर रोक लगाना है, जो इंटरनेट से जुड़े होते हैं और संवेदनशील क्षेत्रों में काम कर सकते हैं। अमेरिकी सांसदों का कहना है कि देश की सुरक्षा को देखते हुए समय रहते कदम उठाना जरूरी है।
अमेरिका को आखिर किस बात का डर है?
अमेरिकी सांसदों का मानना है कि चीन ने जिस तरह कम कीमत वाले ड्रोन के जरिए वैश्विक बाजार में बड़ी हिस्सेदारी हासिल की, अब वही रणनीति रोबोटिक्स सेक्टर में भी अपनाई जा रही है। उनका कहना है कि यदि ऐसे रोबोट सरकारी संस्थानों, फैक्ट्रियों, अस्पतालों, बिजली संयंत्रों या सैन्य ठिकानों में इस्तेमाल होने लगे, तो वे केवल काम करने वाली मशीनें नहीं रहेंगे बल्कि बड़ी मात्रा में डेटा भी जुटा सकते हैं।
यही वजह है कि अमेरिका को आशंका है कि भविष्य में ऐसे रोबोट जासूसी, साइबर हमलों या महत्वपूर्ण सिस्टम को बाधित करने का माध्यम बन सकते हैं।
रोबोट कैसे बन सकते हैं सुरक्षा के लिए खतरा?
विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक AI रोबोट कैमरा, माइक्रोफोन, सेंसर और मैपिंग तकनीक से लैस होते हैं। यदि किसी रोबोट के सॉफ्टवेयर से छेड़छाड़ हो जाए या उसे रिमोट तरीके से नियंत्रित किया जाए, तो वह संवेदनशील इलाकों की जानकारी जुटा सकता है। इतना ही नहीं, सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए किसी औद्योगिक या सरकारी सिस्टम के कामकाज को प्रभावित करने की आशंका भी जताई गई है।

विशेषज्ञों ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान एसोसिएशन फॉर अनक्रूड व्हीकल सिस्टम्स इंटरनेशनल (AUVSI) के अध्यक्ष और सीईओ माइकल रॉबिन्स ने कहा कि चीनी कंपनियां दुनिया के ह्यूमनॉइड रोबोट बाजार में बड़ी हिस्सेदारी रखती हैं। सरकारी सब्सिडी के कारण उनके रोबोट अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध हैं, जिससे कई संस्थान उनकी ओर आकर्षित हो रहे हैं।
रॉबिन्स ने यह भी कहा कि यदि कोई लैपटॉप हैक होता है तो उससे केवल डेटा चोरी हो सकता है, लेकिन एक इंटरनेट से जुड़ा AI रोबोट किसी फैक्ट्री, पावर प्लांट या सैन्य परिसर के भीतर जाकर वास्तविक समय में निगरानी कर सकता है और जरूरत पड़ने पर सिस्टम को नुकसान भी पहुंचा सकता है।
AI ने साइबर सुरक्षा की चुनौती बढ़ाई
व्हाइट हाउस की पूर्व टेक्नोलॉजी सलाहकार लिंडसे गोरमन ने सुनवाई के दौरान कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने साइबर सुरक्षा की चुनौतियों को पहले से कहीं अधिक गंभीर बना दिया है। उनका मानना है कि AI की मदद से साइबर हमले ज्यादा तेज, सस्ते और प्रभावी हो सकते हैं। ऐसे में अमेरिका को सुरक्षित और कम लागत वाले AI मॉडल विकसित करने होंगे ताकि वह तकनीकी प्रतिस्पर्धा में पीछे न रहे।
सहयोगी देशों के साथ मिलकर बनेगी रणनीति
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि अमेरिका को सुरक्षित AI और रोबोटिक्स इकोसिस्टम विकसित करने के लिए जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, इजरायल, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों जैसे भरोसेमंद साझेदारों के साथ मिलकर काम करना चाहिए। इससे सुरक्षित तकनीक विकसित करने और संभावित साइबर खतरों से बेहतर तरीके से निपटने में मदद मिल सकती है।
सिर्फ रोबोट नहीं, दूसरे तकनीकी मुद्दों पर भी चर्चा
संसदीय समिति की बैठक में केवल रोबोटिक्स ही नहीं बल्कि AI की मदद से संचार नेटवर्क को मजबूत बनाने, ब्रॉडबैंड समन्वय सुधारने और विदेशों से संचालित अवैध रोबोकॉल नेटवर्क पर रोक लगाने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई। अमेरिका का मानना है कि आने वाले समय में AI और रोबोटिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने वाले हैं, इसलिए इन क्षेत्रों में पहले से मजबूत सुरक्षा व्यवस्था तैयार करना जरूरी है।
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