चंडीगढ़। हरियाणा में ईएसआई हेल्थ सिस्टम से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आने के बाद सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पानीपत ईएसआई अस्पताल से मरीजों को निजी अस्पतालों में संदिग्ध तरीके से रेफर किए जाने की शिकायतों कोकी जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को सौंपने के निर्देश दिए हैं।
इस मामले में अब तक पानीपत ईएसआई अस्पताल के तीन कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है, जबकि पांच चिकित्सा अधीक्षकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है। इसके अलावा, छह निजी अस्पतालों को पैनल से बाहर करने के लिए नोटिस जारी किया गया है।
जाँच में ये तथ्य आए सामने
जांच में सामने आया कि वर्ष 2020-21 से 2023-24 के बीच असामान्य रूप से बड़ी संख्या में मरीजों को रेफर किया गया। साथ ही, रेफरल फॉर्म पर डॉक्टरों के हस्ताक्षरों में भी गड़बड़ी पाई गई, जिससे पूरे मामले में अनियमितताओं की आशंका और गहरा गई है।
सरकार ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए राज्यभर में ईएसआई के पैनल पर शामिल 133 निजी अस्पतालों के रिकॉर्ड की भी जांच कराने का फैसला किया है, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी का समय रहते पता लगाया जा सके।
स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने दिए निर्देश
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के निर्देश भी दिए हैं। पानीपत ईएसआई अस्पताल की क्षमता 75 से बढ़ाकर 100 बेड करने, जगाधरी अस्पताल को 80 से 100 बेड तक विस्तारित करने और हिसार ईएसआई डिस्पेंसरी को 12 से बढ़ाकर 50 बेड करने की योजना बनाई गई है।
बावल और बहादुरगढ़ में निर्माणाधीन 100-100 बेड के नए ईएसआई अस्पतालों का कार्य भी जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी अस्पतालों में आधुनिक उपकरण लगाने और डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ की कमी दूर करने पर भी जोर दिया गया है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्राथमिकता है, और किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या लापरवाही को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

