शिवम मिश्रा, रायपुर। छत्तीसगढ़ की धरती से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने आस्था और विश्वास को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना ने आस्था से लेकर अपराध तक का सफर तय कर धर्म को कलंकित कर दिया है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्या विश्वास के नाम पर अंधविश्वास का गंदा खेल खेला जा रहा है? क्या भागवत कथा के पीछे कुछ और ही कथा लिखी जा रही है? क्या दूसरों के लिए सत्कर्मों की पाठशाला लगाकर खुद दुष्कर्म जैसी घटनाओं की साजिश रची जा रही है? क्या बाबा के दरबार में बताया कुछ और, और बंद कमरे में दिखाया कुछ और ही जा रहा है? आखिर चमत्कार के खेल में बलात्कार के दृश्य से पर्दा कैसे उठा और “चावल वाले बाबा” के नाम से मशहूर नरेंद्र नयन शास्त्री दुष्कर्म के आरोप में कैसे घिरे? आखिर दूसरों का भविष्य बताने वाले खुद के भविष्य को देखने से कैसे चूक गए? जानिए पूरी कहानी बाबा के दरबार से कोर्ट, कचहरी और जेल तक की।

क्या है पूरा मामला

दरअसल, महासमुंद जिले के बागबाहरा थाना क्षेत्र में “चावल वाले बाबा” और “चाय वाले बाबा” के नाम से मशहूर कथावाचक तथा खुद को भगवान का अनुयायी बताने वाले नरेंद्र नयन शास्त्री को एक महिला से दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली यह खबर पूरे प्रदेश को झकझोरने के लिए काफी है। धर्म, आस्था और संस्कारों का संदेश देने वाले एक चर्चित पंडित पर लगे गंभीर आरोपों ने श्रद्धा और विश्वास की बुनियाद को ही सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। देश पहले भी कई स्वयंभू बाबाओं और कथित धर्मगुरुओं के विवादित और आपराधिक मामलों का गवाह रहा है और अब छत्तीसगढ़ के चर्चित पंडित नरेंद्र नयन शास्त्री का नाम भी एक गंभीर आपराधिक मामले में सामने आया है। पंडित पर दुष्कर्म का आरोप लगाया गया है।

इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि पीड़िता की शिकायत के लगभग दो से ढाई साल बाद महासमुंद पुलिस ने आरोपी पंडित के खिलाफ दुष्कर्म का अपराध दर्ज किया है। महासमुंद पुलिस ने पंडित नरेंद्र नयन शास्त्री को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया और एक दिन की रिमांड ली है। कथित आरोपी बाबा से पुलिस पूछताछ में जुटी हुई है। ऐसा माना जा रहा है कि नरेंद्र नयन शास्त्री से पूछताछ में कई बड़े और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।

पंडित नरेंद्र नयन शास्त्री का प्रभाव केवल धार्मिक आयोजनों और प्रवचनों तक सीमित नहीं रहा है। उनके अनुयायियों और आशीर्वाद प्राप्त करने वालों में कई प्रमुख राजनेता, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और उद्योग जगत से जुड़े प्रभावशाली लोग शामिल बताए जाते हैं। उन पर दर्ज आपराधिक मामले ने प्रभावशाली तबके की भी बेचैनी बढ़ा दी है। सत्ता के गलियारों में इस बात को लेकर चर्चाएं तेज हैं कि इस प्रकरण की आंच कहीं और तक न पहुंच जाए, लिहाजा पंडित नरेंद्र नयन शास्त्री को कानूनी अड़चनों से राहत दिलाने के इरादे से प्रयास तेज हो चुके हैं।

दुष्कर्म के गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज

पुलिस की दर्ज एफआईआर के अनुसार, महिला ने बागबाहरा थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में पंडित नरेंद्र नयन शास्त्री पर विश्वास का दुरुपयोग कर दुष्कर्म करने का गंभीर आरोप लगाया गया। पुलिस ने प्रारंभिक तफ्तीश में तथ्यों को प्रथम दृष्टया सही पाते हुए त्वरित कार्रवाई की। और आरोपी को रायपुर जिले के सिलयारी स्थित उसके आश्रम से हिरासत में लेकर बागबाहरा लाया गया। बागबाहरा पुलिस ने आरोपी नरेंद्र नयन शास्त्री के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(ज), 376(2)(एन) और 376(2)(एम) के तहत बलात्कार का अपराध पंजीबद्ध किया है।

आस्था के पीछे का स्याह सच?

लल्लूराम डॉट कॉम की टीम जब आस्था की हकीकत जानने रायपुर से 22 किलोमीटर दूर सिलयारी के मलौद गांव स्थित नरेंद्र नयन शास्त्री के आश्रम और मंदिर पहुंची, तो वहां की हकीकत कुछ और ही नजर आने लगी। धीरे-धीरे नरेंद्र नयन शास्त्री की असली जानकारी सामने आने लगी। ग्रामीणों से पूछकर हमारी टीम सबसे पहले तिगड्डा चौराहे से मुड़कर बाबा के कथित आश्रम बंगले पहुंची। इस आलीशान बंगले में हर सुविधा बाहर से नजर आ रही थी। तीन बड़ी बकारें, आलीशान लग्जरी स्ट्रक्चर, महंगे हाईब्रिड पौधे, बंगले के चारों तरफ पूरा बाउंड्रीवॉल और पूरा बंगला सीसीटीवी कैमरों से लैस नजर आ रहा था। इस आलीशान बंगले को देखकर आश्रम कम और किसी बड़े उद्योगपति का फार्महाउस/रिसॉर्ट ज्यादा नजर आ रहा था।

फिर टीम ने गांव में ग्रामीणों से नरेंद्र नयन शास्त्री के बारे में पूछताछ शुरू की। तब टीम ने देखा कि नरेंद्र नयन शास्त्री का नाम सुनते ही ग्रामीणों ने बातचीत बंद-सी कर दी। फिर टीम की बहुत प्रयासों के बाद ग्रामीणों ने भरोसा कर कई चौंका देने वाली बातें कहीं। ग्रामीणों के मुताबिक, इस आलीशान बंगले में जिसे बाबा ने अपना आश्रम घोषित किया है, वहां तो दिन भर कोई आता-जाता ही नहीं है। कभी सप्ताह में इक्का-दुक्का लोग आते-जाते नजर आ जाते हैं। आश्रम जैसी कोई गतिविधि तो उस जगह पर संचालित ही नहीं होती है।

लल्लूराम की टीम ने चाय दुकान, पान ठेला, समोसे की दुकान और राह चलते कुछ ग्रामीणों से बातचीत की। इस पूरी बातचीत में सभी की एक बाते पूरी मिलती जुलती नजर आ रही थी की हम तो कभी मंदिर के अंदर पहुंचे ही नहीं है, हमने कभी बाबा के दरबार को नहीं देखा है। पंडित जी के लोगों का व्यवहार हम गांव वालों के लिए बिल्कुल भी सही नहीं है। इस बातचीत में कितनी सच्चाई और कितनी झूठ है। इसे जानने टीम मलौद गांव स्थित नरेंद्र शास्त्री के मंदिर पहुंचे, जहां हर दिन दरबार सजाया करते हैं।

इसी बीच रास्ते पूछने के दौरान एक ग्रामीण ने टीम से पूछा वो गिरफ्तार हो गए आपको उनके मंदिर फिर क्यों जाना है? इस पर टीम ने बताया कि हमे उस दरबार के बारे में कुछ जानकारी लेनी है। ग्रामीण ने कहा, मंदिर में आसानी से अंदर नहीं जाने दिया जाता है। सिर्फ वो ही लोग जा सकते है जो समय लेकर आते हैं।

इसी बीच लल्लूराम की टीम मंदिर पहुंची। मंदिर का गेट बंद था, गेट के अंदर तीन चार लड़के नजर आ रहे थे। हमने आधा गेट खोलकर मंदिर के भीतर प्रवेश करने की अनुमति मांगे तो हमे अंदर आने से मना कर दिया गया। इसी बीच एक व्यक्ति तेज आवाज से चिल्लाकर पूछता है, क्यों आए हो क्या काम है? किससे मिलना है? टीम ने फिर कहा अंदर आ जाए? आकर सब बता देंगे, फिर ये कहा गया अंदर नहीं आने देंगे आप पहले बाहर निकल जाओ, लेकिन मंदिर की भव्यता बाहर से भी देखते ही बन रही थी।

मंदिर से लगे एक किलोमीटर के गांव में टीम ने कुछ ग्रामीण महिलाओं से बातचीत की, उनका कहना था मंदिर के सिर्फ एक ही हिस्से तक ग्रामीणों को प्रवेश दिया जाता है, मंदिर प्रबंधन के लोगो के व्यवहार को देखकर हम मंदिर जाना भी बंद कर दिए है। हमारे गांव से अब एक भी व्यक्ति उस मंदिर में नहीं जाता है। मंदिर में ग्रामीणों को देखकर बाहर जाने सख्त रूप से कहा जाता है। वहां सिर्फ़ बड़ी गाड़ियां और बड़े लोग ही आते जाते नजर आते है। हमने कई बार तो कई बड़े साहब और अफसरो को भी आते जाते देखते है। नवरात्र, शिवरात्रि और हनुमान जयंती जैसे पावन अवसरों पर भी ग्रामीण और बच्चो को अंदर नहीं आने दिया जाता है। हमे ऐसा लगता है की हम ग़रीब और गांव से है। इसीलिए शायद ऐसा व्यवहार हमारे साथ किया जाता है।

पूरे इलाके में जिन ग्रामीणों से हमने पूछा की बाबा जी को कभी सामने से देखा है? या उनके दरबार में कभी दरबारी बनकर पहुंचे हैं? तो सभी एक बात को कहते नजर आए की हमने तो कभी सामने से नहीं देखा, और ना बाबा जी के दरबार में ओरावेश मिल पाया है।

सोचिए जिस बाबा के इतने बड़े बड़े लोग भक्त हो, इतने प्रभावशालियों को बाबा का आशीर्वाद मिलता हो, जिस व्यक्ति को लोग अपना गुरु, संकटमोचक मानते थे, उसी पंडित का व्यहार अपने ग्रामीणों के प्रति ऐसा क्यों है? इस पूरे घटनाक्रम से एक सवाल मन के भीतर जरूर उत्पन्न हुए, की क्या मंदिर पर दरबार के भीतर धर्म के आड़ में कोई अधर्म का खेल खेला जाता है?

पुलिस की सतर्कता और चुप्पी भी

पूरे मामले की गंभीरता और हाईप्रोफाइल पहचान को देखते हुए महासमुंद पुलिस बेहद सतर्क नजर आ रही है। जिले के आला अधिकारियों ने मीडिया से दूरी बना रखी है। वरिष्ठ अफसर जांच को लेकर कुछ भी खुलकर कहते नजर नहीं आ रहे है। महासमुंद एसपी प्रभात कुमार ने लल्लूराम डॉट कॉम से बातचीत में बताया की मामले की जांच की जा रही है। इस विषय पर अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। हमने एक दिन की रिमांड लेकर आरोपी से पूछताछ शुरू कर दी है।

समाज के सामने बड़ा सवाल

यह घटना फिर एक बार आस्था और अंधविश्वास के बीच की महीन लकीर पर सवाल खड़े करती है। क्या चमत्कार के दावों की आड़ में लोगों का शोषण हो रहा है? क्या धर्म के नाम पर बने आश्रमों की निगरानी का कोई तंत्र नहीं होना चाहिए? एक महिला की हिम्मत से यह मामला सामने तो आ गया, लेकिन हजारों अनुयायियों का टूटा हुआ विश्वास और समाज में फैली वेदना को शब्दों में बता पाना मुश्किल है।

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