EU Sanctions On Indian Companies: यूरोपीय यूनियन यानी ईयू ने भारत को जोर का झटका दिया है। यूरोपीय यूनियन ने भारत-चीन की 50 कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। प्रतिबंध लगाने के पीछ यूक्रेन पर रूसी हमलों का हवाला दिया है। EU ने लान किया कि वह भारत और अन्य देशों की उन 50 कंपनियों पर एक्सपोर्ट कंट्रोल के उपाय लागू करेगा, जो रूस की सेना के साथ सीधे कारोबार करती हैं।
दरअसल ईयू ने मंगलवार को यूक्रेन पर हमले के चलते रूस पर 21वें प्रतिबंध पैकेज (EU Sanctions On Russia) की घोषणा की। यूरोपीय यूनियन ने ऐलान किया कि भारत-चीन और तुर्कीये समेत कई देशों की 50 कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया जाता है। ये सभी कंपनियां रूस की सेना के साथ सीधे कारोबार करती है।
यूरोपीय संघ की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि काजा कल्लास ने कहा कि ईयू के इस ऐलान का असर भारत और चीन के साथ ही किर्गिस्तान, कजाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात में स्थित कंपनियों पर पड़ेगा और इन पर निर्यात प्रतिबंध लगाए जाएंगे। ईयू ने ये फैसला रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से लिया है, लेकिन इससे सिर्फ रूस ही नहीं, तमाम देश प्रभावित होंगे। ये उपाय यूक्रेन में मॉस्को के सैन्य अभियान को वित्तपोषित करने और बनाए रखने की क्षमता पर लगाम लगाने के लिए किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम धीरे-धीरे रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था की नींव को ध्वस्त करते जा रहे हैं। अब ब्रुसेल्स दो साल से अधिक समय में रूस पर प्रतिबंधों की सबसे बड़ी लिस्ट तैयार कर रहा है।
निशाने पर रूस को समर्थन देने वाली कंपनियां
काजा कल्लास ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर इन प्रतिबंधों से जुड़ी जानकारी शेयर की। इसमें उन्होंने कहा कि, ‘हम रूस के सैन्य-औद्योगिक तंत्र (Military-Industrial Complex) को समर्थन देने वाली तमाम कंपनियों को भी निशाना बना रहे है। नई सूची में ड्रोन निर्माण क्षेत्र से जुड़ी 30 से अधिक संस्थाओं को शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही 50 कंपनियों पर नए एक्सपोर्ट कंट्रोल उपाय लागू किए जाएंगे।
90 बैंकों की संपत्ति जब्त होगी
ईयू के प्रस्तावित पैकेज में उन बैंकों, हथियार निर्माताओं, तेल व्यापारियों, रिफाइनरियों और क्रिप्टो ऑपरेटरों को टारगेट किया गया है, जो तीसरे देशों में स्थित हैं और उन पर रूस को मौजूदा प्रतिबंधों से बचने में मदद करने का आरोप है। करीब 90 बैंकों की संपत्ति जब्त की जा सकती है। जबकि रूस और अन्य देशों के 30 से अधिक बैंकों के साथ लेनदेन पर और प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इसके अलावा 11 क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म पर भी ट्रांजैक्शन बैन लगाने की तैयारी है।
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