कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। दतिया विधानसभा उपचुनाव में मतदान तो हो गया है,लेकिन अब सबसे बड़ी सियासी बहस महिलाओं की वोटिंग को लेकर छिड़ गई है। पिछले चार विधानसभा चुनावों के ट्रेंड पर नजर डालें तो 2023 को छोड़कर हर चुनाव में पुरुषों का मतदान महिलाओं से ज्यादा रहा। लेकिन 2023 में पहली बार महिलाओं ने पुरुषों को पीछे छोड़ दिया था। अब 2026 के उपचुनाव में तस्वीर फिर पूरी तरह पलट गई है। महिलाओं की वोटिंग में आई बड़ी गिरावट पर कांग्रेस और बीजेपी दोनों अपनी-अपनी जीत के दावे कर रही हैं। देखिए ये खास रिपोर्ट।

महिला मतदान 68.48 फीसदी रहा

दरअसल दतिया विधानसभा उपचुनाव 2026 में कुल 2 लाख 20 हजार 410 मतदाता थे। इनमें 1 लाख 57 हजार 460 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया और कुल 71.44 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। पुरुष मतदाताओं की संख्या 1 लाख 16 हजार 116 रही ,जिनमें से 86 हजार 30 पुरुषों ने मतदान किया। यानी पुरुष मतदान प्रतिशत 74.09 फीसदी रहा। वहीं 1 लाख 4 हजार 284 महिला मतदाताओं में से 71 हजार 413 महिलाओं ने मतदान किया। यानी महिला मतदान 68.48 फीसदी रहा। इस तरह पुरुषों की तुलना में महिलाओं का मतदान 5.61 प्रतिशत कम रहा।

पिछले चार विधानसभा चुनावों का रिकॉर्ड देखें तो एक दिलचस्प ट्रेंड सामने

  • 2008 में पुरुष मतदान 74.99 फीसदी और महिला मतदान 71.55 फीसदी रहा। यानी पुरुष 3.44 फीसदी आगे थे
  • 2013 में पुरुषों ने 76.76 फीसदी और महिलाओं ने 72.46 फीसदी मतदान किया। यहां भी पुरुष 4.30 फीसदी आगे रहे
  • 2018 में अंतर घटकर महज 0.81 फीसदी रह गया। पुरुष मतदान 77.15 फीसदी और महिला मतदान 76.34 फीसदी दर्ज हुआ
  • 2023 विधानसभा चुनाव में इतिहास बदल गया। पहली बार महिलाओं ने पुरुषों को पीछे छोड़ दिया।पुरुष मतदान 79.28 फीसदी,जबकि महिला मतदान 81.22 फीसदी रहा। यानी महिलाएं 1.94 फीसदी आगे निकल गई थीं

करीब 12.74 फीसदी की गिरावट

आपने इन आंकड़ों को देखा, लेकिन 2026 के उपचुनाव में पूरा समीकरण फिर बदल गया। महिला मतदान 81.22 फीसदी से घटकर 68.48 फीसदी पर आ गया। यानी करीब 12.74 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई। वहीं पुरुष मतदान भी घटा,लेकिन महिलाओं की तुलना में कम गिरा,यानी जो महिलाएं 2023 में चुनावी भागीदारी की सबसे बड़ी ताकत बनी थीं, वे इस उपचुनाव में अपेक्षाकृत कम संख्या में मतदान केंद्रों तक पहुंचीं।

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कांग्रेसः- बड़ी संख्या में महिलाएं वोट डालने नहीं पहुंचीं

इसी मुद्दे पर अब सियासत भी तेज हो गई है,कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी सरकार ने महिलाओं के साथ लाडली बहना की राशि को लेकर विश्वासघात किया है। राम पांडे कांग्रेस प्रवक्ता का यह भी कहना है कि कई मतदान केंद्रों पर कथित बूथ कैप्चरिंग, हंगामे और तनाव के माहौल के कारण बड़ी संख्या में महिलाएं वोट डालने नहीं पहुंचीं। कांग्रेस का दावा है कि महिलाओं की कम भागीदारी बीजेपी के लिए खतरे की घंटी है और इसका फायदा कांग्रेस को मिलेगा।

बीजेपीः- मतदान में कमी का वोट बैंक पर कोई असर नहीं

वहीं बीजेपी इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर रही है। बीजेपी प्रवक्ता-धैर्यवर्धन शर्मा- का कहना है कि मतदान प्रतिशत में गिरावट की सबसे बड़ी वजह स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के दौरान मतदाता सूची का पुनरीक्षण और नामों का हटना है। पार्टी का दावा है कि महिला मतदान में कमी का उसके वोट बैंक पर कोई असर नहीं पड़ेगा और बीजेपी प्रत्याशी ही जीत दर्ज करेगा।

3 अगस्त को फैसला

बहरहाल आंकड़े एक हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक मायने अलग-अलग है। कांग्रेस महिलाओं की कम वोटिंग को सत्ता विरोधी संकेत मान रही है, जबकि बीजेपी इसे केवल मतदाता सूची में बदलाव का असर बता रही है। अब सवाल यही है कि क्या महिलाओं की कम भागीदारी वास्तव में चुनावी नतीजों की दिशा बदलेगी, या फिर दोनों दलों के दावे सिर्फ सियासी बयान साबित होंगे। इसका फैसला अब 3 अगस्त को ईवीएम खुलने के साथ ही होगा।

धैर्यवर्धन शर्मा- प्रवक्ता MP BJP

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राम पांडे- प्रवक्ता, मध्यप्रदेश कांग्रेस

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