भिवानी। हरियाणा के भिवानी में लेडी टीचर मनीषा की मौत का मामला एक बार फिर गरमा गया है। सोमवार को मनीषा के पिता संजय अपने गांव ढाणी लक्ष्मण से जिला मुख्यालय (DC ऑफिस) के बाहर पक्के धरने पर बैठने के लिए निकले थे। लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही कुड़ल गांव के पास रोक लिया।

पुलिस का कहना है कि उनके पास धरने की मंजूरी नहीं थी। इसके बाद साथ आए ग्रामीणों ने हंगामा शुरू कर दिया। कुछ महिलाएं सड़क पर ही बैठकर रोने लगीं। तनाव को देखते हुए कुड़ल गांव में भारी पुलिस तैनात कर दी गई है।

DC ऑफिस से कांग्रेस नेता हटाए, पुलिस से तीखी बहस

दूसरी तरफ जिला मुख्यालय पर पहले से मौजूद कांग्रेस नेता प्रदीप गुलिया और समर्थकों को भी पुलिस ने हटा दिया। इस दौरान पुलिस और नेताओं के बीच जमकर बहस हुई। पूरे इलाके में पुलिस अलर्ट पर है। मनीषा के पिता का कहना है कि बेटी की मौत को दस महीने बीत चुके हैं। देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी (CBI) ने अभी तक यह साफ नहीं किया कि मनीषा की मौत कैसे हुई थी।

क्या है पूरा मामला

मनीषा 11 अगस्त 2025 को अपने गांव से स्कूल ड्यूटी पर गई थी। इसके बाद उसने आगे की पढ़ाई के दाखिले के लिए जाने की बात कही थी, लेकिन वह घर नहीं लौटी। दो दिन बाद 13 अगस्त को मनीषा का शव सिंघानी गांव के खेतों में मिला। परिवार ने हत्या का आरोप लगाया था।

सुसाइड थ्योरी पर बढ़ा था गुस्सा

पुलिस ने पहले हत्या का केस दर्ज किया था। लेकिन 18 अगस्त को पुलिस ने इसे खुदकुशी का मामला बता दिया। इसके बाद लोगों का गुस्सा भड़क गया और बड़ा आंदोलन शुरू हो गया। भारी विरोध को देखते हुए मनीषा के शव का तीसरी बार दिल्ली के बड़े अस्पताल (AIIMS) में दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया था। इसके बाद 26 अगस्त 2025 को यह मामला जांच एजेंसी को सौंपा गया था।

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