सुमन चौहान, नीलोखेड़ी/करनाल। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार से संबद्ध विस्तार शिक्षा संस्थान, नीलोखेड़ी में 3 से 7 अगस्त 2026 तक “उच्च मूल्य वाली फसलों के लिए प्रभावी कृषि प्रसार प्रणाली” विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन कुलपति प्रो. बी.आर. काम्बोज के मार्गदर्शन और विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. नरेश कौशिक के निर्देशन में हुआ। इसमें हरियाणा, पंजाब, बिहार, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और झारखंड के 25 विस्तार अधिकारियों ने भाग लिया।

आधुनिक कृषि प्रसार और उच्च आय वाले कृषि उद्यमों पर रहा फोकस

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को डेयरी, बागवानी, मत्स्य पालन, मशरूम उत्पादन, मोती की खेती तथा अन्य उच्च आय वाले कृषि उद्यमों के प्रसार मॉडल से अवगत कराया गया। इसके साथ ही आधुनिक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT), जीआईएस, जीपीएस, रिमोट सेंसिंग, उद्यमिता विकास, किसान कल्याण योजनाएं, फेक न्यूज की पहचान तथा उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों के माध्यम से आय और रोजगार बढ़ाने जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी दी।

विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

प्रशिक्षण में विस्तार शिक्षा संस्थान के विशेषज्ञों के अलावा राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई), महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय, हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान, जिला उद्यान विभाग, कुरुक्षेत्र तथा प्रगतिशील किसानों और सफल कृषि उद्यमियों ने भी व्याख्यान दिए और व्यावहारिक जानकारी साझा की।

प्रतिभागियों को कराया गया शैक्षणिक भ्रमण

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को कलरी खालसा स्थित श्री पर्ल इंडस्ट्री, सुल्तान फिश फार्म (बूटाना), राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (करनाल), बागवानी महाविद्यालय अंजनथली तथा बाजवा मशरूम फार्म (भोर सैदां, कुरुक्षेत्र) का शैक्षणिक भ्रमण भी कराया गया, जहां उन्होंने आधुनिक कृषि और उद्यमिता के सफल मॉडल देखे।

कम भूमि में अधिक आय के बताए उपाय

समापन समारोह में कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. रमेश कुमार गोयल ने कहा कि बागवानी आधारित उच्च मूल्य वाली फसलें किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री और बेहतर विपणन व्यवस्था अपनाकर किसान कम भूमि से भी अधिक लाभ कमा सकते हैं। उन्होंने विस्तार अधिकारियों से किसानों को इन फसलों के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।

कृषि प्रसार प्रणाली की भूमिका बताई

संस्थान के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. विजयपाल सिंह यादव ने कहा कि किसानों तक वैज्ञानिक तकनीकों और उच्च मूल्य वाले कृषि उद्यमों की जानकारी प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए विस्तार अधिकारियों का आधुनिक तकनीकों से अपडेट रहना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम अधिकारियों के ज्ञान, कौशल और व्यावहारिक क्षमता को मजबूत करते हैं। साथ ही उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण में प्राप्त अनुभवों का अपने-अपने कार्यक्षेत्र में प्रभावी उपयोग करने की अपील की।

प्रमाण पत्र वितरित, टीम का रहा सहयोग

कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। प्रशिक्षण के सफल आयोजन में प्रभारी डॉ. जसविंद्र कौर के साथ डॉ. सत्यकाम मलिक, डॉ. एस.आर. वर्मा, डॉ. अनिल कुमार रोहिला और डॉ. अजय कुमार का विशेष सहयोग रहा।

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