बांग्लादेश में फीफा वर्ल्ड कप के दौरान ब्राजील और अर्जेंटीना के झंडों के बीच अचानक काले और सफेद रंग के कलमा लिखे झंडे दिखाई दिए है. इसे लेकर देश में सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं. यह बांग्लादेश में विदेशी चरमपंथी समूहों की बढ़ती उपस्थिति की ओर इशारा करता है जैसा कि विश्लेषकों का अनुभव बता रहा है. ये झंडे तालिबान, अल-कायदा, इस्लामिक स्टेट और हिज्ब उत-तहरीर जैसे आतंकी संगठनों के द्वारा इस्तेमाल किए जाते है.
बांग्लादेश में सड़कों, पुलों, छतों और बाइक रैलियों में कई ‘कलमा’ झंडे दिखाई देने के बाद सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं. इन झंडों के दिखने से भारत में चिंता बढ़ गई है.
फीफा विश्व कप की गहमागहमी के बीच बांग्लादेश में एक जाना-पहचाना नजारा फिर से देखने को मिल रहा है, और वह है इस्तेमाल इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस), अल-कायदा और तालिबान जैसे आतंकवादी संगठन द्वारा इस्तेमाल किए जानेवाले झंडे. काले और सफेद रंग के झंडे जिन पर कलेमा लिखा है, जो अरबी भाषा में ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ लिखा है. झंडों पर लिखे अरबी भाषा में “ला इलाहा इल्लल्लाह” का अर्थ है अल्लाह के सिवा कोई पूजनीय देवता नहीं.
सोशल मीडिया पर इन झंडों के साथ मोटरसाइकिल रैलियों के वीडियो भी वायरल हो रहे हैं, जिसने पुलिस की नींद उड़ा दी है. इन झंडों का दिखने का सीधा मतलब है बांग्लादेश में विदेशी चरमपंथी गुटों के बढ़ते पैर पसारने का संकेत.
भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने भी हाल ही में चेतावनी दी थी कि बांग्लादेश और पाकिस्तान में हमास की गतिविधियां बढ़ रही हैं. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की फिलिस्तीन के लिए हमदर्दी जगजाहिर है.
झंडों में दो रंग देखे गए है. सफेद बैकग्राउंड पर काले रंग से लिखा झंडा है, जो तालिबान को प्रदर्शित करता है. दूसरा काले बैकग्राउंड पर सफेद रंग में लिखे झंडे जो अल-कायदा, इस्लामिक स्टेट और हिज्ब उत-तहरीर जैसे आतंकी संगठन की पहचान को बताता है.
आपको बताते चले कि हिज्ब उत-तहरीर पर 2009 में शेख हसीना सरकार ने प्रतिबंध लगाया था, लेकिन 2024 की अशांति के बाद इसने अपना दायरा तेजी से बढ़ाया है.
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