हेमंत शर्मा, इंदौर। Special Exclusive Story मध्य प्रदेश के इंदौर में खाद्य विभाग की लगातार छापेमार कार्रवाई के बाद अब जांच व्यवस्था पर ही बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। शहर से लिए जा रहे खाद्य पदार्थों के सैंपल जांच के लिए भोपाल लैब भेजे जा रहे हैं, लेकिन वहां स्टाफ की भारी कमी के कारण रिपोर्ट आने में 2 से 3 महीने तक का वक्त लग रहा है। जबकि नियम के मुताबिक सैंपल भेजने के 14 दिन के भीतर रिपोर्ट आ जाना चाहिए।

इंदौर शहर की स्थिति यह है कि करीब 400 से 500 खाद्य सैंपल्स की रिपोर्ट अब तक लंबित पड़ी हुई है। ऐसे में मिलावटी और संदिग्ध खाद्य पदार्थों पर कार्रवाई की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। खाद्य विभाग अधिकारियों का कहना है कि भोपाल लैब की तरफ से देरी का कारण “स्टाफ की कमी” बताया जा रहा है और इसी वजह से समय पर रिपोर्ट नहीं मिल पा रही। अधिकारियों के मुताबिक, जिन खाद्य पदार्थों में शुरुआती जांच के दौरान मिलावट, मिसब्रांडिंग या अनसेफ होने की आशंका दिखाई देती है, उनके विक्रय पर तुरंत रोक लगाई जाती है।

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संबंधित व्यापारी से बॉन्ड और सिक्योरिटी भरवाई जाती है और रिपोर्ट आने तक उस खाद्य पदार्थ की बिक्री बंद करवाई जाती है। लेकिन रिपोर्ट में महीनों की देरी होने से कार्रवाई भी अधर में लटक रही है। एक तरफ खाद्य विभाग लगातार मिलावटखोरों पर सख्ती के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ लैब रिपोर्ट में हो रही देरी पूरी व्यवस्था की रफ्तार पर सवाल खड़े कर रही है। अब बड़ा सवाल यही है कि जब जांच रिपोर्ट ही महीनों तक अटकी रहेगी, तो मिलावटखोरों पर तेज कार्रवाई कैसे हो पाएगी।

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