शिवम मिश्रा, रायपुर। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि वन विभाग की सफलता केवल बजट व्यय से नहीं, बल्कि प्रभावी वन संरक्षण, गुणवत्तापूर्ण कार्य, पारदर्शिता, सामुदायिक भागीदारी और धरातल पर दिखाई देने वाले परिणामों से मापी जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को सकारात्मक सोच, टीम भावना और उत्तरदायित्व के साथ कार्य करते हुए नियमित एवं साप्ताहिक समीक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के समापन अवसर पर अधिकारियों को संबोधित करते हुए मंत्री कश्यप ने कहा कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में अनेक वनमंडल अधिकारियों ने बजट व्यय के क्षेत्र में अच्छा कार्य किया है। अब व्यय के साथ उससे प्राप्त परिणामों और कार्यों की गुणवत्ता का भी मूल्यांकन किया जाएगा। भविष्य में बजट व्यय को अधिकारियों के वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन से जोड़ा जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल राशि खर्च करना उपलब्धि नहीं है। यह भी देखा जाएगा कि खर्च की गई राशि से वन संरक्षण, वृक्षारोपण, वनवासियों की आजीविका और विभागीय योजनाओं में कितने ठोस परिणाम प्राप्त हुए हैं। इसके लिए आवश्यकतानुसार भौतिक अथवा वर्चुअल माध्यम से नियमित बैठकें आयोजित कर कार्यों की सतत निगरानी की जाए।

वनाश्रित समुदायों को मिले वनोपज का वास्तविक मूल्य

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि वन प्रबंधन मूलतः समुदाय आधारित व्यवस्था है। वनाश्रित समुदायों को वनोपज का उचित और वास्तविक मूल्य दिलाना विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। अधिकारियों को अधिकाधिक फील्ड भ्रमण करना चाहिए, क्योंकि जमीनी स्तर पर उनकी उपस्थिति से जवाबदेही बढ़ेगी और कार्यों की गुणवत्ता भी सुनिश्चित होगी। उन्होंने विभागीय एवं निविदा के माध्यम से कराए जा रहे कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी स्तर पर गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। केवल सामग्री क्रय के बजाय कार्यों के वास्तविक परिणामों और उपयोगिता का मूल्यांकन किया जाए।

खरीद प्रक्रिया में अनियमितता और समायोजन नहीं होगा स्वीकार

मंत्री कश्यप ने खरीद प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाजार दर से अत्यधिक कम कीमत पर प्राप्त सामग्री की गुणवत्ता की गंभीरता से जांच की जानी चाहिए। किसी भी प्रकार के वित्तीय समायोजन अथवा अनियमित प्रथा को तत्काल समाप्त कर सभी खरीद निर्धारित नियमों और पारदर्शी प्रक्रिया के अनुरूप की जाए।

अवैध कटाई की सूचना सबसे पहले विभाग को मिले

वन संरक्षण को विभाग का सर्वोच्च दायित्व बताते हुए उन्होंने कहा कि अवैध वृक्ष कटाई किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी। जंगल एक दिन में नहीं कटता, इसलिए विभाग का सूचना तंत्र इतना मजबूत होना चाहिए कि किसी भी अवैध गतिविधि की जानकारी सबसे पहले विभाग को मिले। अवैध कटाई की सूचना मिलते ही जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध त्वरित और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने तकनीकी स्वीकृति और प्रशासनिक स्वीकृति निर्धारित समय-सीमा में जारी करने के निर्देश भी दिए, ताकि विकास एवं संरक्षण से जुड़े कार्यों के क्रियान्वयन में अनावश्यक विलंब न हो।

प्रकृति के अनुरूप विकसित होगा ईको-टूरिज्म

वन मंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से सामान्य स्थिति बहाल होने के साथ ही ईको-टूरिज्म की व्यापक संभावनाएं विकसित हुई हैं। इन क्षेत्रों में ईको-टूरिज्म का विकास प्रकृति के अनुरूप किया जाए। पर्यटन स्थलों पर प्लास्टिक के उपयोग को हतोत्साहित करने तथा सीमेंट-कंक्रीट आधारित संरचनाओं का उपयोग न्यूनतम रखने के निर्देश दिए, जिससे प्राकृतिक स्वरूप और जैव विविधता सुरक्षित रह सके।

एटीआर और आईटीआर में सफारी संचालन की दिशा में करें कार्य

वन्यजीव संरक्षण की समीक्षा करते हुए मंत्री कश्यप ने अवैध शिकार और वन्यजीव तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण के निर्देश दिए। उन्होंने अचानकमार टाइगर रिजर्व और इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सफारी संचालन प्रारंभ करने की दिशा में आवश्यक कार्यवाही करने को कहा। उन्होंने कांकेर क्षेत्र में भालुओं के सुरक्षित पुनर्वास एवं रिलोकेशन के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने तथा वन्यजीवों के त्वरित बचाव के लिए सभी जिलों में आवश्यक एनिमल रेस्क्यू उपकरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

मंत्री कश्यप ने कहा कि वन और वन्यजीव हमारी अमूल्य प्राकृतिक धरोहर हैं। इनके संरक्षण के साथ वनवासियों की आजीविका, विभागीय सुशासन और कार्यों की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। सभी अधिकारी अपने दायित्वों का ईमानदारी और संवेदनशीलता से निर्वहन करें, ताकि विभागीय योजनाओं के परिणाम स्पष्ट रूप से धरातल पर दिखाई दें।

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