दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले की सिवनी मालवा में दो काले हिरण के हुए शिकार के मामले में चार वन कर्मचारी अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है। इस पूरे मामले में लापरवाही बरतने पर रेंजर, डिप्टी रेंजर के अलावा चार वनरक्षकों को सस्पेंड किया गया। सोमवार देर रात को सभी को निलंबन करने के आदेश दिए है। रेंजर समेत वन कर्मियों ने हिरण के शिकार से हुई मौत को प्राकृतिक दर्शाने की कोशिश की थी। सबूतों को भी सुरक्षित रखने के बजाय उन्हें नष्ट किया। जांच में उनका झूठ बेनकाब हो गया। जिसके बाद सभी को सस्पेंड किया गया है।
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नर्मदापुरम डीएफओ गौरव शर्मा ने बताया कि यह 21 जनवरी की घटना है, सिवनी मालवा के पास बासनिया गांव की घटना है। शिकारी 2 हिरण को लेकर जा रहे थे, गांव वाले ने सूचना लगी तो हिरण को रिवेन्यू भूमि पर ही छोड़ कर चले गए, उसके बाद में हमारे स्टाफ में उसकी प्रॉपर जांच नहीं की, पूरे तथ्य हमारे सामने पुट अप नहीं किए गए। मुखबिर की सूचना पर हमने जिस जिस स्टाफ का नाम सामने आ रहा था, उनकी सीडीआर निकलवाई। जब स्टाफ से कड़ाई से पूछताछ की गई तो सारी बात सामने आई। पता चला कि एक शिकार का प्रकरण था जिसको स्टाफ के कर्मचारियों के द्वारा दबाया जा रहा था और प्राकृतिक मौत बताई जा रही थी। जिसमें उनके द्वारा एक हिरण की बात की गई थी, जबकि इसमें दो हिरण थे। एक हिरण जिंदा था और एक मृत हो गया, उसके बाद इन कर्मचारियों को निलंबित किया गया।
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साथ ही रेंजर के निलंबन के लिए सीसीएफ को पत्र लिखा उन्होंने रेंजर को भी निलंबित कर दिया गया। सीसीएफ अशोक कुमार चौहान ने बताया काले हिरण के शिकार में रेंजर और वनकर्मियों ने लापरवाही बरती। प्राथमिक जांच प्रतिवेदन में संबंधित वन कर्मचारियों द्वारा प्रकरण के वास्तविक स्वरूप को छिपाने एवं जांच में गंभीर लापरवाही बरतने के तथ्य प्रथम दृष्टया सामने आएं। प्रकरण में दोषी पाए गए सिवनी मालवा रेंजर आशीष रावत, वनपाल महेश गौर, वनरक्षक मनीष गौर, रूपक झा, ब्रजेश पगारे एवं पवन उइके को निलंबित किया गया।

