Odisha Desk, भुवनेश्वर: ओडिशा में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम में विजिलेंस विभाग को एक और बड़ी सफलता मिली है। क्योंझर की एक विशेष विजिलेंस अदालत ने चंपुआ ब्लॉक के पूर्व विकास लिपिक (Development Clerk) और स्टोर प्रभारी गणेश्वर गिरि (अब सेवानिवृत्त) को सरकारी धन के गबन के एक पुराने मामले में दोषी करार दिया है। अदालत ने उन्हें दो साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही उन पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न भरने की स्थिति में उन्हें अतिरिक्त सजा काटनी होगी।

आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह मामला वर्ष 2007-08 से 2010-11 के बीच का है। उस दौरान गणेश्वर गिरि चंपुआ ब्लॉक में विकास लिपिक-सह-स्टोर इन-चार्ज के पद पर तैनात थे। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान पद का दुरुपयोग करते हुए सरकारी धन और सामग्रियों में भारी हेराफेरी की थी।

ओडिशा विजिलेंस की जांच में सामने आया कि आरोपी अधिकारी ने चंपुआ ब्लॉक के ‘सीमेंट स्टॉक रजिस्टर’ में जानबूझकर हेरफेर और जालसाजी की थी। रिकॉर्ड में गड़बड़ी करके उन्होंने सरकारी निर्माण कार्यों के लिए आए सीमेंट और उससे जुड़े फंड का गबन किया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए ओडिशा विजिलेंस ने गहन जांच के बाद गणेश्वर गिरि के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (Prevention of Corruption Act, 1988) की धारा 13(2) के साथ पठित 13(1)(c) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 409 (लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात), 468 (जालसाजी) और 471 (फर्जी दस्तावेज को असली के रूप में उपयोग करना) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

क्योंझर के विशेष सतर्कता न्यायाधीश ने मामले से जुड़े सभी गवाहों के बयानों और दस्तावेजी सबूतों की बारिकी से जांच की। अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों को गिरि के खिलाफ पर्याप्त पाया और उन्हें भ्रष्टाचार का दोषी मानते हुए दो वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

इस फैसले के बाद अब राज्य का विजिलेंस विभाग दोषी अधिकारी के खिलाफ एक और सख्त कदम उठाने जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, चूंकि गणेश्वर गिरि अब सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसलिए विजिलेंस विभाग उनके पेंशन लाभों को पूरी तरह से रोकने के लिए संबंधित सक्षम प्राधिकारी से संपर्क करेगा और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू करेगा। विभाग के इस कदम से स्पष्ट है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी भ्रष्ट आचरण करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

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