चंडीगढ़। चर्चित ड्रग्स और पुलिस मिलीभगत से जुड़े मामलेमें बर्खास्त पूर्व एसएसपी राजजीत सिंह को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो व्यक्ति अगस्त 2023 से फरार है और कानून से बच रहा है, वह सीधे एफआईआर या जांच ट्रांसफर की मांग नहीं कर सकता.

हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि याचिकाकर्ता को पहले सरेंडर करना होगा, उसके बाद ही उसकी मांगों पर विचार संभव है। याची पक्ष ने दावा किया कि पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी होने के कारण वह पंजाब पुलिस के भीतर उच्चस्तरीय प्रतिद्वंद्विता का शिकार बना और इसलिए एफआईआर की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या सीबीआई को सौंपी जाए।

याचिका में एनडीपीएस एक्ट सहित की गंभीर धाराओं में दर्ज मामलों की जांच पर सवाल उठाए गए। पंजाब सरकार की ओर से कहा गया कि याची 2023 से फरार है, उसे भगोड़ा घोषित करार दिया जा चुका है, जबकि सह आरोपियों के खिलाफ ट्रायल काफी आगे बढ़ चुका है और 59 अभियोजन गवाहों की गवाही पूरी हो चुकी है।

याची को सेवा से भी बर्खास्त किया जा चुका है और उसने अपने खिलाफ कार्रवाई को सही मंच पर चुनौती तक नहीं दी। बेंच ने कई बार पूछा कि जब आप फरार हैं तो किस अधिकार से अनुच्छेद 226 और धारा 482 के तहत अदालत की असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल चाहते हैं।