भुवनेश्वर/संबलपुर: ओडिशा के हीराकुंड जलाशय के जलस्तर को नियंत्रित करने और बाढ़ प्रबंधन को लेकर राज्य का जल संसाधन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है. वर्तमान में जलाशय लगभग 47 प्रतिशत तक भर चुका है. स्थिति को देखते हुए आज सुबह बांध के 4 गेट खोलकर बाढ़ के पानी की निकासी शुरू कर दी गई है.

जल संसाधन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, वर्तमान में हीराकुंड बांध से करीब 94 हजार क्यूसेक पानी महानदी में छोड़ा जा रहा है. हालांकि, आज शाम तक और 6 गेट खोले जाने का निर्णय लिया गया है, जिसके बाद बांध से कुल 1 लाख 80 हजार क्यूसेक पानी की निकासी होगी. विभाग के अधिकारियों का आकलन है कि हीराकुंड से छोड़ा गया यह पानी अगले 36 से 48 घंटों के भीतर कटक के मुंडली में पहुंचेगा.

ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच बेहतर समन्वय

बाढ़ के सुचारू प्रबंधन के लिए हाल ही में केंद्रीय जल आयोग की अध्यक्षता में ओडिशा और छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक आयोजित की गई थी. महानदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों की स्थिति पर पल-पल की नजर रखने के लिए छत्तीसगढ़ के 8 प्रमुख स्टेशनों पर ओडिशा के 21 जल संसाधन अधिकारियों को तैनात किया गया है. इसके साथ ही छत्तीसगढ़ स्थित कलमा बैराज के गेट भी खोल दिए गए हैं ताकि पानी का प्रवाह सुचारू रहे.

राज्य में बाढ़ का कोई खतरा नहीं

जल संसाधन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में राज्य में किसी भी तरह की खतरनाक स्थिति नहीं है और जलस्तर पूरी तरह से नियंत्रण में है. ऊपरी इलाकों से होने वाले जल भराव और डेटा को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से ओडिशा प्रशासन को पूरा सहयोग मिल रहा है.

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग 13 जुलाई के बाद मौसम का अगला पूर्वानुमान जारी करेगा. इस बीच, हीराकुंड बांध के जलस्तर को योजनाबद्ध तरीके से कम किया जा रहा है, ताकि आगामी दिनों में यदि कोई नया कम दबाव का क्षेत्र (लो-प्रेशर) बनता है और भारी बारिश होती है, तो जलाशय में अतिरिक्त पानी को सुरक्षित रूप से स्टोर किया जा सके.

प्रशासन ने साफ किया है कि महानदी के अलावा राज्य की अन्य किसी भी नदी में जलस्तर खतरनाक रूप से बढ़ने की कोई संभावना नहीं है. इसके अलावा, सुवर्णरेखा नदी की स्थिति को लेकर झारखंड के चांडिल बांध प्रबंधन के साथ भी ओडिशा सरकार लगातार संपर्क में है और दोनों राज्यों के बीच बातचीत जारी है.