Business Desk – फेस्टिव सीजन (Festive Season) से पहले आम लोगों की जेब पर महंगाई का एक और असर पड़ने वाला है। देश की कई बड़ी FMCG और Consumer Goods कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं। इसका असर टूथपेस्ट, डिटर्जेंट, डिशवॉश बार, नमक, पेंट, होम एप्लायंसेज, डेयरी प्रोडक्ट्स और टायर जैसे रोजमर्रा के सामान पर पड़ सकता है।

Hindustan Unilever (HUL), Asian Paints, Dodla Dairy, Havells और Tata Consumer Products समेत कम से कम 8 कंपनियों ने कीमतें बढ़ाने के संकेत दिए हैं। कंपनियों का कहना है कि Middle East में जारी तनाव, कच्चे माल (Input Cost), क्रूड ऑयल और एनर्जी की बढ़ती कीमतों से लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में कीमतें बढ़ाना मजबूरी बन गया है।
कौन-कौन से सामान महंगे हो सकते हैं?
त्योहारों से पहले जिन प्रोडक्ट्स की कीमत बढ़ सकती है, उनमें डिटर्जेंट, डिशवॉश बार, टूथपेस्ट, नमक, पेंट, डेयरी प्रोडक्ट्स, होम एप्लायंसेज और टायर शामिल हैं। कंपनियां दूसरी तिमाही में लगातार दूसरी बार दाम बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं।
HUL बोली- Home Care Segment में कीमतें बढ़ा रहे
देश की सबसे बड़ी FMCG कंपनी Hindustan Unilever (HUL) के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) निरंजन गुप्ता ने एनालिस्ट्स को बताया कि बाहरी परिस्थितियों के कारण क्रूड ऑयल से जुड़े डेरिवेटिव्स महंगे हुए हैं। इसी वजह से कंपनी Home Care Segment में सोच-समझकर कीमतें बढ़ा रही है। इसमें डिटर्जेंट और डिशवॉश बार जैसी कैटेगरी शामिल हैं।
Havells ने 8% और Tata Salt ने 7% तक दाम बढ़ाए
कई कंपनियां पहले ही कीमतें बढ़ा चुकी हैं।
Havells India ने अपने प्रोडक्ट्स के दाम करीब 8% तक बढ़ा दिए हैं।
Tata Consumer Products ने Tata Salt की कीमत लगभग 7% बढ़ा दी है।
इसके अलावा HUL, Dodla Dairy, Asian Paints समेत कई कंपनियां भी आने वाली तिमाहियों में कीमतें बढ़ाने की तैयारी में हैं।
त्योहारों से पहले ही क्यों बढ़ रहे दाम?
अगस्त से नवंबर तक देश में फेस्टिव सीजन रहता है। इसी दौरान रक्षाबंधन, गणेश उत्सव, नवरात्र, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार आते हैं। इस समय Consumer Spending सबसे ज्यादा रहती है।
कई कंपनियों की सालभर की कुल बिक्री का करीब एक-तिहाई (33%) हिस्सा इसी सीजन में होता है। मजबूत मांग को देखते हुए कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डालने की तैयारी कर रही हैं।
कंपनियां कीमतें क्यों बढ़ा रही हैं?
Middle East में जारी संघर्ष और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव से Crude Oil और Energy की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इससे कच्चे माल, ट्रांसपोर्टेशन और मैन्युफैक्चरिंग की लागत बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब Input Cost बढ़ती है तो कंपनियों के लिए पुरानी कीमतों पर सामान बेचना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में वे प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने के लिए कीमतें बढ़ाती हैं।
महंगाई भी बढ़ा रही दबाव
जून महीने में Retail Inflation लगभग एक साल बाद RBI के 4% के लक्ष्य से ऊपर पहुंच गई। हालांकि यह अभी भी RBI के 2% से 6% के टॉलरेंस बैंड के भीतर है।
अगर आने वाले महीनों में कंपनियां लगातार कीमतें बढ़ाती हैं और खाद्य महंगाई भी बढ़ती है, तो महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। RBI का अनुमान है कि मार्च 2027 को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष में औसत महंगाई दर 5.1% रह सकती है।
RBI की बैठक पर भी रहेगी नजर
Reserve Bank of India (RBI) की छह सदस्यीय Monetary Policy Committee (MPC) की बैठक 3 से 5 अगस्त तक होगी। बैठक के बाद ब्याज दरों पर फैसला घोषित किया जाएगा।
फिलहाल विशेषज्ञों का मानना है कि Repo Rate में बदलाव की संभावना कम है, लेकिन महंगाई बढ़ने की स्थिति में आगे RBI की नीति प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
Nomura Holdings की एशिया मुख्य अर्थशास्त्री सोनल वर्मा का कहना है कि Input Cost और कंपनियों के मार्जिन पर बढ़ते दबाव के कारण कंपनियों के पास कीमतें बढ़ाने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बचा है।
वहीं KFC और Pizza Hut चलाने वाली Devyani International के चेयरमैन रविकांत जयपुरिया ने कहा कि फिलहाल मांग बनी हुई है, लेकिन कमजोर मानसून और El Nino का खतरा आगे उपभोक्ता खर्च को प्रभावित कर सकता है।
ग्रामीण और शहरी बाजार में मांग बनी हुई
कंपनियों के मुताबिक फिलहाल ग्रामीण और शहरी दोनों बाजारों में मांग मजबूत बनी हुई है।
Retailers Association of India के सर्वे के अनुसार जून में रिटेल बिक्री पिछले साल की तुलना में 6% बढ़ी। वहीं The Knowledge Company के चेयरमैन अरविंद सिंघल ने कहा कि GST Collection और Highway Toll Revenue जैसे आर्थिक संकेतक भी बाजार में मजबूत मांग का संकेत दे रहे हैं।
क्या होता है El Nino और Input Cost?
El Nino प्रशांत महासागर के पानी के असामान्य रूप से गर्म होने की मौसम संबंधी घटना है। इसके कारण भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे फसलों का उत्पादन घटता है और खाद्य महंगाई बढ़ सकती है।
Input Cost किसी भी प्रोडक्ट को बनाने में लगने वाले कच्चे माल, ईंधन, बिजली, ट्रांसपोर्टेशन और मजदूरी का कुल खर्च होता है। जब यह लागत बढ़ती है तो कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाती हैं, ताकि उनका प्रॉफिट मार्जिन बना रहे।


