Lifestyle Desk – सुबह का नाश्ता सिर्फ पेट भरने का जरिया नहीं, बल्कि दिन की शुरुआत में शरीर को एनर्जी और जरूरी पोषक तत्व देने वाला अहम मील है। नाश्ते में हम क्या खाते हैं, इसका असर हमारी भूख, ऊर्जा और पूरे दिन के खान-पान पर पड़ सकता है। खास बात यह है कि भारतीय नाश्ते में कई ऐसे पारंपरिक व्यंजन शामिल हैं, जिन्हें फर्मेंटेशन यानी किण्वन की प्रक्रिया से तैयार किया जाता है। इडली, डोसा और ढोकला इसके लोकप्रिय उदाहरण हैं। फर्मेंटेड फूड्स को गट हेल्थ के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। आइए जानते हैं इसके सेवन के फायदे।

क्या होता है फर्मेंटेड फूड?
फर्मेंटेशन एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें बैक्टीरिया, यीस्ट या दूसरे सूक्ष्मजीव खाद्य पदार्थों में मौजूद कार्बोहाइड्रेट को बदलते हैं। इस प्रक्रिया से भोजन के स्वाद, बनावट और कुछ पोषक गुणों में बदलाव आता है। दही, इडली, डोसा और ढोकला जैसे कई भारतीय खाद्य पदार्थ इसी प्रक्रिया से तैयार किए जाते हैं।
फर्मेंटेशन के दौरान बनने वाले कुछ यौगिक और जीवित सूक्ष्मजीव आंतों में मौजूद माइक्रोबायोम यानी गट बैक्टीरिया के लिए उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि, हर फर्मेंटेड फूड में प्रोबायोटिक बैक्टीरिया की मात्रा समान नहीं होती और खाना पकाने की प्रक्रिया भी इन सूक्ष्मजीवों को प्रभावित कर सकती है।
इडली और डोसा क्यों हैं लोकप्रिय?
इडली और डोसा के बैटर को चावल और उड़द दाल के मिश्रण को फर्मेंट करके तैयार किया जाता है। फर्मेंटेशन से बैटर की बनावट और स्वाद बदलता है और कुछ पोषक तत्व शरीर के लिए आसानी से उपलब्ध हो सकते हैं। उड़द दाल होने के कारण इसमें प्रोटीन भी मिलता है।
हालांकि, केवल इडली या डोसा खाने से मेटाबॉलिज्म अचानक तेज नहीं हो जाता। इन्हें संतुलित नाश्ते का हिस्सा बनाना ज्यादा महत्वपूर्ण है। इडली के साथ सांभर और सब्जियां या डोसा के साथ दाल-सब्जियों से बना सांभर लेने पर भोजन में प्रोटीन और फाइबर की मात्रा बढ़ाई जा सकती है।
ढोकला भी है फर्मेंटेड फूड
गुजरात का लोकप्रिय ढोकला भी फर्मेंटेशन के जरिए तैयार किया जाता है। बेसन से बनने वाला ढोकला प्रोटीन का एक स्रोत हो सकता है और इसकी हल्की बनावट इसे नाश्ते के लिए लोकप्रिय बनाती है। अगर इसके साथ हरी चटनी और सब्जियों को शामिल किया जाए तो नाश्ता अधिक संतुलित बनाया जा सकता है।
दही-जलेबी को लेकर थोड़ा संभलकर
दही खुद एक फर्मेंटेड फूड है और इसमें मौजूद कुछ जीवित बैक्टीरिया आंतों के लिए उपयोगी हो सकते हैं। लेकिन दही-जलेबी को पूरी तरह हेल्दी नाश्ता मानना सही नहीं होगा। जलेबी में चीनी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है। इसलिए दही-जलेबी को कभी-कभार खाने तक सीमित रखना बेहतर है, खासकर यदि आप ब्लड शुगर या वजन को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं।
फर्मेंटेड फूड्स के फायदे क्या हैं?
डाइट में अलग-अलग तरह के फर्मेंटेड फूड्स शामिल करने से भोजन की विविधता बढ़ती है। कुछ फर्मेंटेड खाद्य पदार्थ पाचन को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं और गट माइक्रोबायोम को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ मामलों में फर्मेंटेशन से ऐसे यौगिक भी बनते हैं जो शरीर के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
लेकिन फर्मेंटेड फूड्स को किसी “मेटाबॉलिज्म बूस्टर” की तरह देखना सही नहीं है। मेटाबॉलिज्म पर नींद, शारीरिक गतिविधि, मांसपेशियों की मात्रा, उम्र, हार्मोन और कुल डाइट जैसे कई कारकों का असर पड़ता है।
इसलिए नाश्ते में इडली, डोसा, ढोकला या दही जैसे फर्मेंटेड फूड्स जरूर शामिल किए जा सकते हैं, लेकिन इनके साथ प्रोटीन, फाइबर, फल-सब्जियां और पर्याप्त पानी को भी डाइट का हिस्सा बनाना जरूरी है।



