गुजरात की राजधानी गांधीनगर के कुडासन इलाके में एक बड़ा हादसा सामने आया है, जहां एक निर्माणाधीन इमारत का स्लैब अचानक गिर गया। इस दुर्घटना के कारण वहां काम कर रहे 15 मजदूर मलबे के नीचे दब गए। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, फायर ब्रिगेड और आपदा राहत टीमों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। कई घंटों की कड़ी मशक्कत और सावधानीपूर्वक चलाए गए अभियान के बाद मलबे में फंसे सभी 15 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
राहत और बचाव कार्य का विवरण
कुडासन स्थित निर्माण स्थल पर जब मजदूर स्लैब ढालने का काम कर रहे थे, उसी समय अचानक ढांचे का एक बड़ा हिस्सा भरभरा कर नीचे आ गिरा। मलबे के भारी ढेर के नीचे फंसे मजदूरों तक पहुंचना रेस्क्यू टीम के लिए एक बड़ी चुनौती थी। फायर अधिकारी राजेश पटेल के नेतृत्व में राहत टीमों ने अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से सावधानी से मलबा हटाना शुरू किया ताकि अंदर दबे किसी भी मजदूर को अतिरिक्त चोट न पहुंचे।
घायलों का उपचार
रेस्क्यू किए गए 15 मजदूरों में से 12 की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। शेष 3 मजदूरों को मामूली चोटें आई थीं, जिन्हें प्राथमिक उपचार देने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। राहत की बात यह है कि इस दर्दनाक हादसे में किसी भी जान-माल का नुकसान नहीं हुआ है और सभी मजदूर खतरे से बाहर हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राज्य नेतृत्व की सक्रियता
हादसे की खबर मिलते ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल से फोन पर बातचीत की। अमित शाह ने राहत और बचाव कार्यों की प्रगति, घायलों के स्वास्थ्य और रेस्क्यू की स्थिति का पूरा अपडेट लिया। उन्होंने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हुए आश्वस्त किया कि केंद्र और राज्य सरकार पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
घटनास्थल पर गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी और स्थानीय विधायक अल्पेश खोडाजी ठाकोर ने भी पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। हर्ष सांघवी ने राहत कार्य में लगे अधिकारियों को निर्देश दिए कि घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराई जाएं।
सुरक्षा मानकों और कारणों की जांच
इस हादसे ने एक बार फिर निर्माण स्थलों पर मजदूरों की सुरक्षा और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती प्राथमिकताओं के तहत बचाव कार्य पूरा होने के बाद अब स्थानीय प्रशासन ने दुर्घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं।
जांच टीमें इस बात का पता लगाएंगी कि स्लैब गिरने की मुख्य वजह क्या थी, क्या निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हो रहा था या फिर सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वाले ठेकेदारों या बिल्डरों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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