देहरादून. उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने डिजिटल इंडिया को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने एक्स पर लिखा कि 2,000 से ऊपर के UPI लेनदेन पर शुल्क का ऐलान करना, क्या यह मोदी जी के जन्मदिन पर जनता को दिया गया “तोहफा” है? सरकार कहती है कि इसका असर उपभोक्ता पर नहीं पड़ेगा. तो सवाल है दुकानदार अपनी जेब से भुगतान करेगा? आखिर बोझ किसी न किसी पर तो पड़ेगा ही. बोए पेड़ बबूल का, तो आम कहां से होए.

बता दें कि इसे मु्द्दे को लेकर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने भी सरकार पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि “डिजिटल इंडिया” और “कैशलेस इकोनॉमी” का झांसा देने वाली मोदी सरकार अब UPI पेमेंट पर भी वसूली का रास्ता खोल दिया है! अभी तक UPI पेमेंट पर कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं था, लेकिन अब 2000 से ऊपर के हर यूपीआई पेमेंट पर चार्ज वसूला जाएगा! अभी हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने UPI की वाहवाही लूटते हुए इसे भारत की FinTech क्रांति का “अनडिस्प्यूटेड चैंपियन” बताया था, मगर सरकार ने इसे भी “वसूली का औजार” बना लिया?

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आगे यशपाल आर्य़ ने कहा कि 2014 से लेकर अब तक मोदी सरकार में बैंकों ने “मिनिमम बैलेंस की पेनल्टी” के नाम पर पब्लिक से चुपचाप 40,000 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की है. वित्त मंत्रालय द्वारा राज्यसभा में दी गई सबसे ताजा जानकारी के मुताबिक ही पिछले 4 वर्षों (वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2025-26) में ही सरकारी और निजी बैंकों ने मिलकर करीब 26,170 करोड़ रुपये से अधिक की “मिनिमम बैलेंस पेनेल्टी” वसूली है.

जानें UPI Payment Charges कंडीशन

बता दें कि नई व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ बड़े मर्चेंट UPI लेनदेन पर 0.4 फीसदी MDR लगेगा. इस शुल्क का भुगतान ग्राहक नहीं, बल्कि कारोबारी करेगा. प्रति लेनदेन एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है. सरकार के मुताबिक, हर महीने यूपीआई QR के जरिए 1 लाख रुपये तक कमाने वाले छोटे कारोबारियों पर कोई शुल्क नहीं लगेगा. वहीं, 2,000 रुपये से कम के मर्चेंट भुगतान भी मुफ्त रहेंगे. रेलवे, ईंधन, टेलीकॉम, बिल भुगतान और बीमा जैसी जरूरी सेवाओं के लिए 2,000 रुपये से ज्यादा के लेनदेन पर 5 रुपये का तय शुल्क होगा. वहीं, म्यूचुअल फंड और सिक्योरिटीज से जुड़े भुगतान पर MDR 0.02 फीसदी होगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है.