वाराणसी में गंगा का जलस्तर 24 घंटे में 0.94 मीटर बढ़कर 69.44 मीटर पहुंच गया है, जिससे घाटों और आसपास के इलाकों में पानी भरने लगा है. प्रयागराज में भी गंगा-यमुना का पानी चेतावनी बिंदु के करीब पहुंचने के साथ सड़कों पर फैल गया है और प्रशासन ने बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया है.

वाराणसी/प्रयागराज. वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर शनिवार से लगातार बढ़ रहा है. रविवार देर रात जलस्तर में और तेजी आई, जबकि सोमवार सुबह से हो रही बारिश ने चिंता बढ़ा दी है. गंगा का पानी बढ़ने से घाटों के बीच संपर्क टूट गया है, वहीं प्रयागराज में भी गंगा और यमुना का जलस्तर लगातार ऊपर जा रहा है.

वाराणसी में बढ़ा जलस्तर

बीते 24 घंटे में गंगा का जलस्तर 0.94 मीटर बढ़ा है और अब यह 69.44 मीटर दर्ज किया गया है. यह चेतावनी बिंदु से महज 0.82 मीटर नीचे है. पुराने अस्सी घाट के रास्ते और गलियों में पानी पहुंचने लगा है, जबकि सुबह-ए-बनारस का मंच एक बार फिर जलमग्न हो गया है.

केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार, गंगा के जलस्तर में करीब 5 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. वाराणसी में चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर और खतरे का निशान 71.26 मीटर है.

जलस्तर में लगातार वृद्धि से बाढ़ की आशंका बढ़ गई है. बुंदेलखंड की ओर बहने वाली केन, बेतवा और बेलन नदी भी उफान पर हैं. इन नदियों का पानी यमुना के रास्ते प्रयागराज संगम में पहुंच रहा है, जिसका असर वाराणसी में भी देखने को मिल रहा है.

घाटों तक पहुंचा पानी

बढ़ते जलस्तर से सबसे अधिक परेशानी तीर्थ पुरोहितों और अंतिम संस्कार करने वालों को हो रही है. मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट की गलियों में पानी भर गया है, जबकि जल पुलिस के थाने में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है.

मणिकर्णिका घाट के ऊपरी हिस्से में, जिसे छत का हिस्सा माना जाता है, अब दाह संस्कार किया जा रहा है. स्थानीय निवासी विनोद कुमार त्रिपाठी ने बताया कि गंगा का जलस्तर फिर तेजी से बढ़ रहा है, इसलिए उन्हें अपनी चौकी पीछे ले जानी पड़ रही है. पूजा-पाठ में भी परेशानी हो रही है. उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही जलस्तर कम होगा.

प्रयागराज में भी बढ़ा पानी

लगातार बारिश के चलते प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है. दोनों नदियां चेतावनी बिंदु के करीब पहुंचने लगी हैं, जिससे तटवर्ती क्षेत्रों और निचले मोहल्लों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है. प्रशासन ने अलर्ट घोषित कर बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया है.

तटवर्ती इलाकों के लोग सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे हैं. प्रयागराज-बदरा-सोनौती-जौनपुर संपर्क मार्ग भी बाढ़ की चपेट में आ गया है. मुख्य मार्ग पर घुटनों तक पानी पहुंचने से लोगों को आवाजाही में परेशानी हो रही है.

स्थानीय लोगों और राहगीरों के मुताबिक, यह समस्या हर वर्ष सामने आती है. उनके अनुसार, इससे 20-25 गांव बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं. नदियों का पानी पक्के घाटों की सीढ़ियां पार कर संपर्क मार्गों तक पहुंच गया है, जिसके कारण फ्लोटिंग रेस्तरां तक जाने वाला रास्ता पूरी तरह जलमग्न हो गया है.

NDRF-SDRF तैनात

पुलिस, NDRF और SDRF की टीमों को सभी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और तटीय इलाकों में तैनात किया गया है. तटीय और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है.