कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। सबसे बड़े अस्पताल जयारोग्य यानी JAH में आज एक ऐसी स्थिति देखने को मिली जिसने प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां भर्ती सैकड़ों मरीजों को आज दोपहर का खाना नसीब नहीं हुआ। वजह जानकर आप हैरान रह जाएंगे। अस्पताल की किचन में गैस सिलेंडर ही खत्म हो गए। बताया जा रहा है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण गैस एजेंसी के पास स्टॉक की कमी थी, लेकिन इस चक्कर में उन मरीजों की थाली सूनी रह गई जिन्हें समय पर पौष्टिक आहार मिलना जरूरी था।

ग्वालियर का जयारोग्य अस्पताल, जहां हर रोज करीब 500 मरीजों के लिए सुबह का नाश्ता और दो वक्त का खाना तैयार किया जाता है। लेकिन आज यहां की किचन में सन्नाटा पसरा रह गया। हर महीने की एक तारीख को आने वाले सिलेंडर आज नहीं पहुंचे। नतीजा ये हुआ कि दोपहर में कई वार्डों तक खाना पहुंचा ही नहीं। परेशान अटेंडर्स को अस्पताल के बाहर से खाने का इंतजाम करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

जब व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई, तब किचन स्टाफ ने कमान संभाली। किचन प्रभारी डॉ. वीरेंद्र वर्मा के निर्देश पर LDC कमल और हेल्पर बच्चू खुद अपने निजी दो पहिया वाहनों से सिलेंडर अरेंज करके लाए, तब कहीं जाकर देर से खाना तैयार हो सका।

अस्पताल प्रबंधन की मानें तो गैस एजेंसी ने मिडिल ईस्ट युद्ध के चलते स्टॉक न होने का हवाला दिया है। ऐसे में किचन प्रभारी डॉ वीरेंद्र वर्मा ने बताया कि रोजाना करीब 500 मरीजों के भोजन के लिए महीने में 25 से 40 सिलेंडरों की जरूरत होती है। फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था कर ली गई है और एजेंसी को सख्त हिदायत दी गई है कि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न हो। कल तक सिलेंडर का नया स्टॉक पहुंचने की उम्मीद है।

बहरहाल सवाल ये उठता है कि क्या इतने बड़े अस्पताल की व्यवस्था सिर्फ एक कॉल या एक एजेंसी के भरोसे चलती है? अगर स्टाफ ने निजी वाहनों से सिलेंडर न लाए होते, तो शायद मरीजों को रात का खाना भी नसीब नहीं होता। उम्मीद है कि ‘सख्त हिदायत’ के बाद अब भविष्य में मरीजों की थाली पर संकट नहीं आएगा।

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