Dharm Desk – दिन की शुरुआत शुभ हो तो पूरा दिन अच्छा जाता है. सुबह उठते ही किए गए कार्य पूरे दिन की दिशा तय करते हैं. इसी क्रम में हथेलियों के दर्शन करने की परंपरा सदियों पुरानी है. बड़े-बुजुर्ग भी अक्सर इस आदत को अपनाने की सलाह देते है. शास्त्रों में इसे न केवल धार्मिक, बल्कि मासिनक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी लाभकारी बताया है.

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मनुष्य की हथेली को अत्यंत पवित्र माना है. मान्यता है कि, हथेली के अग्रभाग में धन की देवी लक्ष्मी, मध्य भाग में विद्या की देवी सरस्वती और मूल भाग में पालनहार भगवान का वास होता है. यही कारण है कि सुबह उठते ही सबसे पहले अपनी हथेलियों के दर्शन करना शुभ होता है.
शास्त्रों में ‘करदर्शनम्’ का विशेष उल्लेख मिलता है. सुबह उठते समय इस मंत्र का जाप करने का विधान बताया गया है…
कराग्रे वसते लक्ष्मीः, करमध्ये सरस्वती.
करमूले तु गोविन्दः, प्रभाते करदर्शनम्॥
मंत्र का मूल अर्थ है…
इस मंत्र का अर्थ है कि हाथों के अग्रभाग में लक्ष्मी, मध्य में सरस्वती और मूल में भगवान का निवास है. प्रातः इनका स्मरण करने से जीनव में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है l, और कार्यों में सफलता मिलने की संभावना बढ़ती है.
आत्मविश्वास और कर्मशीलता बढ़ती
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस प्रक्रिया से व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास और कर्मशीलता बढ़ती है. यह केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि मनो वैज्ञानिक रूप से भी लाभ कारी है. सुबह-सुबह हथेलियों को देखने से आंखों पर अचानक तेज रोशनी का प्रभाव नहीं पड़ता. जिससे दृष्टि पर सकारात्मक असर होता है, साथ ही यह आदत मन को एकाग्र करने में भी सहायक मानी जाती है.
इस विधि से करें हथेली दर्शन
हथेलियों के दर्शन के बाद उन्हें आपस में रगड़कर चेहरे पर लगाने की भी सलाह दी जाती है. इससे शरीर में ऊर्जा का संचार होता है. दिनभर ताजगी बनी रहती है. इसे सात्विक जीवनशैली की शुरुआत के रूप में देखा जाता है.
धरती को प्रणाम करना चाहिए
इसके अलावा, सुबह उठते ही सीधे जमीन पर पैर रखने से पहले धरती को प्रणाम करने और आभार व्यक्त करने की परंपरा भी प्रचलित है. इसके बाद घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना शुभ माना जाता है. ऐसा करने से परिवार में सकारात्मक वातावरण बनता है. जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है.

