Business Desk – Global Market Today : एशियाई शेयर बाजारों में मंगलवार, 28 जुलाई को भारी दबाव देखने को मिला। अमेरिकी चिप कंपनियों में तेज बिकवाली का असर एशिया के बाजारों पर भी पड़ा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स करीब 8 फीसदी टूट गया, जबकि जापान का निक्केई 225 भी 4 फीसदी से ज्यादा लुढ़क गया। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी टेक कंपनियों के तिमाही नतीजों और AI सेक्टर की आगे की ग्रोथ पर टिकी हुई है।

दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क कोस्पी इंडेक्स 8.70 फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा। वहीं स्मॉल-कैप कोस्डैक इंडेक्स में 3.63 फीसदी की कमजोरी रही। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 4.21 फीसदी गिर गया, जबकि टॉपिक्स इंडेक्स 0.63 फीसदी नीचे रहा। ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 भी शुरुआती कारोबार में 0.38 फीसदी फिसल गया।
अमेरिकी बाजार में मिला-जुला कारोबार
सोमवार को वॉल स्ट्रीट का कारोबार मिला-जुला रहा। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.51 फीसदी बढ़कर 52,210.08 पर बंद हुआ। S&P 500 इंडेक्स मामूली 0.02 फीसदी की बढ़त के साथ 7,413.18 पर बंद हुआ, जबकि नैस्डैक 0.18 फीसदी गिरकर 24,932.08 पर बंद हुआ।
बाजार में सतर्कता की सबसे बड़ी वजह इस सप्ताह आने वाले माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, मेटा और एप्पल के तिमाही नतीजे हैं। निवेशक यह भी आकलन कर रहे हैं कि AI आधारित तेजी आगे भी जारी रहेगी या उसकी रफ्तार धीमी पड़ने लगी है।
चिप शेयरों में लगातार तीसरे दिन बिकवाली
अमेरिकी चिप कंपनियों के शेयरों में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट रही। Nvidia और AMD के शेयर करीब 5-5 फीसदी टूट गए। Seagate के शेयर तिमाही नतीजों से पहले 4 फीसदी गिर गए।
वहीं SK Hynix के अमेरिका में लिस्टेड ADRs में 7.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह अपने IPO प्राइस 149 डॉलर से नीचे बंद हुआ। Micron के शेयर करीब 2 फीसदी और Western Digital के शेयर करीब 4 फीसदी टूट गए।
अमेरिका-ईरान तनाव कम होने की उम्मीद
Bloomberg की रिपोर्ट के मुताबिक, Axios ने दावा किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल टाल दिया है ताकि कूटनीतिक बातचीत को एक और मौका दिया जा सके। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों देशों के बीच कोई ठोस समझौता हुआ है या नहीं।
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान और ओमान के अधिकारी होर्मुज जलडमरूमध्य से शिपिंग दोबारा शुरू कराने को लेकर भी बातचीत कर रहे हैं। यह दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है और सामान्य परिस्थितियों में वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।
कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की उम्मीदों के चलते कच्चे तेल की कीमतों में लगातार नरमी बनी हुई है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 82 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया है। वहीं ब्रेंट क्रूड पिछले कारोबारी सत्र में 7 फीसदी से ज्यादा गिरने के बाद 88 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। इससे वैश्विक महंगाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई है।
सोने की कीमतें ऊंचे स्तर पर कायम
महंगाई और ब्याज दरों को लेकर आशंकाएं कम होने के बावजूद सोना मजबूत बना हुआ है। सोमवार की बढ़त के बाद शुरुआती कारोबार में सोना करीब 4,075 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा।
हालांकि पिछले पांच महीनों में सोने की कीमतों में 20 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। इसके बावजूद जून के आखिर से यह 4,000 डॉलर प्रति औंस के अहम स्तर के ऊपर बना हुआ है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कम कीमत पर खरीदारी (बार्गेन बायिंग) से सोने को फिलहाल सहारा मिल रहा है।
अब किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर?
आने वाले दिनों में वैश्विक बाजार की दिशा कई अहम घटनाओं से तय होगी। निवेशकों की नजर माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, मेटा और एप्पल के तिमाही नतीजों पर रहेगी। इसके अलावा AI सेक्टर की ग्रोथ, अमेरिका-ईरान वार्ता की प्रगति, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक महंगाई से जुड़े संकेत भी बाजार की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


