Business Desk – Gold Silver Prices Today : US फेडरल रिजर्व बैंक की मीटिंग से पहले कमोडिटी मार्केट में थोड़ी तेजी देखी जा रही है. मंगलवार, 28 अप्रैल को COMEX पर सोने की कीमतें $4,703.70 प्रति औंस पर बंद हुईं, जबकि चांदी की कीमतें $75.405 प्रति औंस तक पहुंच गईं. फिलहाल, मार्केट का ध्यान US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान की ओर से पेश किए गए एक प्रस्ताव की समीक्षा पर टिका है.

क्या तनाव खत्म होगा?
ईरान ने अमेरिका को युद्धविराम का प्रस्ताव भेजा है. अगर अमेरिका इसे स्वीकार कर लेता है, तो यह मौजूदा तनाव के तुरंत खत्म होने का संकेत होगा. होर्मुज जलडमरूमध्य और अन्य जलमार्ग, जो फिलहाल US सेनाओं की नाकेबंदी में हैं, फिर से खोल दिए जाएँगे.
इसके अलावा, कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और अन्य कमोडिटीज़ की वैश्विक आपूर्ति सामान्य हो जाएगी. अगर ऐसा होता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के बाद मार्केट राहत की साँस ले सकता है. हालांकि, स्थिति इतनी आसान नहीं है, क्योंकि ईरान द्वारा रखी गई एक खास शर्त US को तनाव खत्म करने का फैसला लेने से रोक सकती है. US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प काफ़ी समय से लगातार यह कहते आ रहे हैं कि वे ईरान को परमाणु हथियार बनाने की इजाजत नहीं देंगे.
इसके विपरीत, ईरान के प्रस्ताव में यह शर्त है कि पहले दुश्मनी खत्म होनी चाहिए. मुख्य जलमार्ग फिर से खोले जाने चाहिए. US सेनाओं की नाकेबंदी हटाई जानी चाहिए. अगर US इन शर्तों पर राजी होता है, तभी बातचीत के अगले दौर में परमाणु वार्ता की जाएगी. फिर भी, तनाव कम होने के संकेतों के चलते, कच्चे तेल की कीमतें आज फिर से बढ़ती हुई दिख रही हैं.
क्या MCX में तेजी आएगी?
सोमवार हफ्ते के पहले ट्रेडिंग दिन MCX पर सोने की कीमतें 151,747 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुईं, जबकि चांदी की कीमतें 242,200 प्रति किलोग्राम पर बंद हुईं. अगर मध्य पूर्व में तनाव नहीं बढ़ता है, तो MCX पर सोने और चांदी की कीमतों में भी तेजी का रुख देखा जा सकता है.
इस अनिश्चितता भरे माहौल के बीच भी, कमोडिटी मार्केट पर फिलहाल जो दबाव है, उसका मुख्य कारण मैक्रोइकोनॉमिक कारक हैं. हालांकि सोने और चांदी में आज थोड़ी रिकवरी दिख रही है, लेकिन काफी समय से उनकी कीमतों पर काफी दबाव बना हुआ है.
फेडरल रिजर्व बैंक की मीटिंग कब है?
US का केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व अपनी मीटिंग 28-29 अप्रैल को करेगा, जो आज से शुरू हो रही है. मध्य-पूर्व में जारी तनाव को देखते हुए, यह अनुमान लगाया जा रहा है कि ब्याज दरें एक बार फिर अपरिवर्तित रखी जा सकती हैं. बैठक के नतीजों के सामने आने के बाद बाजार की स्थितियों में बदलाव आ सकता है.
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