मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी उद्देश्य से POCSO जागरूकता माह के दौरान दिल्ली के सभी स्कूलों में छात्रों को उनकी सुरक्षा, व्यक्तिगत सीमाओं और किसी भी तरह के अनुचित व्यवहार की पहचान करने के बारे में जागरूक किया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्कूलों में आयोजित होने वाले विशेष सत्रों के माध्यम से बच्चों को ‘गुड टच और बैड टच’ (Good touch-bad touch) की समझ दी जाएगी, ताकि वे किसी भी संदिग्ध या असहज स्थिति को पहचान सकें और समय रहते अपने अभिभावकों, शिक्षकों या संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दे सकें।

सरकार ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों के लिए बाल सुरक्षा प्रोटोकॉल को अनिवार्य कर दिया है। स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े सभी दिशा-निर्देश प्रभावी रूप से लागू हों और कर्मचारियों को भी आवश्यक संवेदनशीलता व प्रशिक्षण दिया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि सभी स्कूल 15 दिनों के भीतर इन सुरक्षा उपायों के क्रियान्वयन की अनुपालन रिपोर्ट संबंधित विभाग को सौंपें। सरकार का उद्देश्य स्कूलों में ऐसा सुरक्षित और संवेदनशील माहौल तैयार करना है, जहां बच्चे बिना किसी भय के शिक्षा प्राप्त कर सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा, “दिल्ली का POCSO जागरूकता माह सिर्फ एक जागरूकता अभियान से कहीं बढ़कर है। इस जुलाई, दिल्ली का हर स्कूल ‘गुड टच और बैड टच’ जागरूकता सत्र आयोजित करेगा, अनिवार्य बाल सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करेगा और 15 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट सौंपेगा।” इस अभियान के तहत सभी सरकारी और निजी स्कूलों में छात्रों को ‘गुड टच और बैड टच’ की जानकारी दी जाएगी, ताकि वे सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श के बीच अंतर समझ सकें तथा किसी भी असहज स्थिति में समय रहते अपने माता-पिता, शिक्षकों या संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दे सकें।

सरकार ने सभी स्कूलों के लिए बाल सुरक्षा प्रोटोकॉल को अनिवार्य किया है। स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े सभी दिशा-निर्देश प्रभावी रूप से लागू हों और शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों को भी आवश्यक प्रशिक्षण एवं संवेदनशीलता प्रदान की जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सभी स्कूलों को 15 दिनों के भीतर इन सुरक्षा उपायों के क्रियान्वयन की अनुपालन रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी। इस पहल का उद्देश्य स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित, संवेदनशील और भरोसेमंद वातावरण तैयार करना है, जहां वे बिना किसी डर के शिक्षा प्राप्त कर सकें। पॉक्सो जागरूकता माह के दौरान छात्रों, शिक्षकों और स्कूल स्टाफ को पॉक्सो (POCSO) अधिनियम और बाल संरक्षण से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण प्रावधानों की भी जानकारी दी जाएगी, ताकि बाल शोषण की रोकथाम और शिकायतों के त्वरित समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकें।

उन्होंने एक बयान में कहा कि माता-पिता, शिक्षकों, दिल्ली पुलिस, जिलाधिकारियों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के सहयोग से यह अभियान संचालित किया जाएगा, ताकि बच्चों की सुरक्षा के लिए समाज के सभी प्रमुख वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा, “इस जुलाई दिल्ली का हर स्कूल ‘गुड टच और बैड टच’ जागरूकता सत्र आयोजित करेगा, अनिवार्य बाल सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करेगा और 15 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट सौंपेगा।”

महीने भर चलने वाले इस अभियान का उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों में बाल सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना और यह सुनिश्चित करना है कि सुरक्षा संबंधी उपाय स्कूलों की व्यवस्था का स्थायी हिस्सा बनें। इस पहल के तहत जुलाई के अंत तक दिल्ली के सभी 5,633 स्कूलों में बाल संरक्षण समितियों (Child Protection Committees) का गठन किया जाएगा। ये समितियां स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की निगरानी करेंगी और आवश्यक कदम उठाएंगी। इसके अलावा, सभी शिक्षकों और स्कूल कर्मचारियों को यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम के प्रावधानों पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की पहचान कर समय पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित कर सकें।

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