देश में E20 पेट्रोल (20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर बढ़ते विवाद के बीच सरकार ने शनिवार को स्पष्ट किया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कोई जल्दबाजी में लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि यह वर्षों की वैज्ञानिक जांच, परीक्षण और चरणबद्ध प्रक्रिया का परिणाम है। सरकार का दावा है कि बड़े पैमाने पर हुई टेस्टिंग में E20 फ्यूल से वाहनों को नुकसान पहुंचने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है।
दिल्ली में आयोजित इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स की प्रेस कॉन्फ्रेंस में इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड की पूर्व CMD वर्तिका शुक्ला ने बताया कि वर्ष 2013-14 में पेट्रोल में केवल 1.5% एथेनॉल मिलाया जाता था। अब देश ने तय समय से पांच साल पहले, दिसंबर 2025 तक 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) का लक्ष्य हासिल कर लिया है।
ऑटो कंपनियों का दावा: टेस्टिंग में नहीं मिली कोई बड़ी समस्या
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बजाज ऑटो, टीवीएस, टोयोटा किर्लोस्कर, मारुति सुजुकी, हुंडई और हीरो मोटोकॉर्प के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। मारुति सुजुकी के राहुल भारती ने कहा कि E20 फ्यूल की व्यापक टेस्टिंग में कोई चिंताजनक तकनीकी समस्या सामने नहीं आई। हालांकि, 2023 से पहले निर्मित पेट्रोल वाहनों की अनुकूलता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
फॉर्मूला वन में भी इस्तेमाल हो रहा एथेनॉल आधारित ईंधन
टोयोटा किर्लोस्कर के विक्रम गुलाटी ने बताया कि हाई-परफॉर्मेंस फॉर्मूला वन रेसिंग कारों में भी एथेनॉल आधारित ईंधन का उपयोग किया जा रहा है। सरकार के अनुसार, E20 फ्यूल BS-VI उत्सर्जन मानकों के अनुरूप है और इसका उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन घटाकर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।
सरकार बनाम वाहन मालिक: विवाद क्यों?
E20 पेट्रोल का सबसे अधिक विरोध 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों के मालिकों की ओर से हो रहा है। उनका आरोप है कि इससे माइलेज घट रहा है, मेंटेनेंस खर्च बढ़ रहा है और इंजन के पार्ट्स जल्दी खराब हो रहे हैं। वहीं सरकार का कहना है कि माइलेज में मामूली कमी संभव है, लेकिन इंजन की परफॉर्मेंस और पिकअप पर इसका सकारात्मक असर पड़ता है।
वैज्ञानिक संस्थाओं ने किया परीक्षण
सरकार के मुताबिक, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) और SIAM समेत प्रमुख संस्थानों ने E20 फ्यूल की व्यापक टेस्टिंग की है। पूर्व IOCL चेयरमैन बी. अशोक ने भी कहा कि अब तक किसी वैज्ञानिक अध्ययन में E20 से इंजन को नुकसान या माइलेज पर गंभीर प्रभाव के ठोस सबूत नहीं मिले हैं। उनका दावा है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग से भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है, किसानों की आय बढ़ी है और कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है।
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