लखनऊ के केडी सिंह बाबू स्टेडियम में 2100 महिलाओं ने एक साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देकर हरियाली तीज को हरित संकल्प और नारी शक्ति के उत्सव में बदल दिया. शिवि शिल्प ग्राम के ‘घर-घर हरियाली’ अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में विश्व रिकॉर्ड बनाया गया.
सतीश सिंह, लखनऊ. आमतौर पर हरियाली तीज का नाम आते ही झूले, मेहंदी, सोलह श्रृंगार और लोकगीतों की तस्वीर सामने आती है, लेकिन इस बार लखनऊ में तीज का रंग कुछ अलग नजर आया. केडी सिंह बाबू स्टेडियम में 2100 महिलाओं ने एक साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देकर त्योहार को हरित संकल्प और नारी शक्ति के उत्सव में बदल दिया.

शिवि शिल्प ग्राम की ओर से आयोजित ‘घर-घर हरियाली’ अभियान के तहत हुए इस आयोजन में 2100 महिलाओं की सहभागिता के साथ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया गया. कार्यक्रम में महापौर सुषमा खर्कवाल ने शामिल होकर महिलाओं का उत्साह बढ़ाया.
तीज में पौधों का संदेश
कार्यक्रम की खासियत यह रही कि यहां हरियाली तीज को केवल परंपरा और उत्सव तक सीमित नहीं रखा गया. महिलाओं ने हरियाली को त्योहार की पहचान से आगे बढ़ाकर पर्यावरण बचाने की जिम्मेदारी से जोड़ दिया.

महापौर सुषमा खर्कवाल ने कहा कि हरियाली तीज भारतीय संस्कृति में प्रकृति के प्रति प्रेम और जुड़ाव का प्रतीक है. ऐसे आयोजन पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी अभियान नहीं रहने देते, बल्कि उसे जनभागीदारी के जरिए जनआंदोलन बनाने की दिशा में ले जाते हैं.
उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल का संकल्प लेने की अपील की.

2100 महिलाओं का रिकॉर्ड
आयोजन में 2100 महिलाओं की मौजूदगी अपने आप में आकर्षण का केंद्र रही. एक साथ इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं की सहभागिता ने आयोजन को रिकॉर्ड बनाने के साथ सामाजिक संदेश का मंच भी बना दिया.

‘घर-घर हरियाली’ का संदेश साफ था, सिर्फ पौधा लगाना पर्याप्त नहीं, उसे बड़ा करना भी उतना ही जरूरी है. यही वजह रही कि तीज के पारंपरिक उत्सव में पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा प्रमुखता से उभरा.

परंपरा के साथ पर्यावरण
कार्यक्रम में लखनऊ समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों से महिलाएं पहुंचीं. पूर्व महामंत्री, अवध क्षेत्र राजेश्वरी त्रिपाठी, कौशल्या सिंह सहित बड़ी संख्या में महिला शक्ति की मौजूदगी रही.

आयोजक एवं अध्यक्ष पुनीता भटनागर समेत आयोजन से जुड़े सभी लोगों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी गई. हरियाली तीज पर लखनऊ का यह आयोजन इस मायने में भी खास रहा कि यहां त्योहार की हरियाली को शहर की हरियाली से जोड़ने की कोशिश हुई.

झूले और लोकपरंपराओं के बीच पौधों की बात हुई और उत्सव के साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण बचाने का संदेश भी दिया गया.


