अमित पाण्डेय, खैरागढ़। सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई को किताब-कॉपी तक सीमित न रखकर उसे खेल, गतिविधियों और तकनीक से जोड़ने वाले शिक्षक राजेश कुमार प्रजापति का चयन डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी स्मृति पुरस्कार 2026 के लिए हुआ है। छुईखदान विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला मरदकठेरा के प्रधान पाठक राजेश प्रजापति के नवाचारी शिक्षण कार्य को राज्य स्तर पर एक बार फिर पहचान मिली है।

खास बात यह है कि पिछले साल ही उन्हें 5 सितंबर 2025 को राजभवन रायपुर में राज्य शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया गया था। अब बख्शी स्मृति पुरस्कार के लिए चयन उनके शिक्षकीय सफर में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

खेल और गतिविधियों से पढ़ाई को बनाया रोचक

राजेश प्रजापति के सम्मान की वजह केवल उनका शिक्षक होना नहीं, बल्कि बच्चों को पढ़ाने का उनका अलग और प्रयोगधर्मी तरीका है। मरदकठेरा स्कूल में वे संस्कारयुक्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाने और शिक्षण सहायक सामग्री के इस्तेमाल पर जोर देते हैं।

स्कूल में स्मार्ट कक्षा, सामान्य ज्ञान चर्चा, योग-व्यायाम और कामिशिबाई थिएटर जैसी गतिविधियां कराई जाती हैं। इन प्रयोगों का उद्देश्य बच्चों के लिए पढ़ाई को रुचिकर और आसान बनाना है।

‘करके सीखने’ पर जोर

स्कूल में बच्चों को सिर्फ पाठ पढ़ाने के बजाय उन्हें खुद गतिविधियों में शामिल होकर सीखने और अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर दिए जाते हैं। कबाड़ से जुगाड़, शिक्षण सहायक सामग्री निर्माण, बस्तामुक्त कक्षा और क्रियात्मक शोधकार्य जैसी गतिविधियों के साथ रंगोली, चित्रकला, मूर्तिकला और बाल-संसद का आयोजन किया जाता है।

इन गतिविधियों के जरिए बच्चों की रचनात्मकता के साथ उनकी नेतृत्व क्षमता को विकसित करने पर भी काम किया जाता है। वहीं स्वच्छता अभियान, पर्यावरण जागरूकता और सीडबॉल निर्माण जैसी गतिविधियों से बच्चों को प्रकृति और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने का प्रयास किया जाता है।

पालकों और समुदाय को भी जोड़ा

राजेश प्रजापति ने स्कूल और समुदाय के बीच की दूरी कम करने के लिए भी पहल की है। पालक संपर्क, सामुदायिक सहभागिता और PLC सदस्यों के साथ चर्चा के माध्यम से स्कूल की गतिविधियों में पालकों और समुदाय की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाता है।

बच्चों के कौशल विकास के लिए समर कैंप और ऑनलाइन कक्षाओं का आयोजन किया गया है। इसके अलावा सोशल मीडिया का शैक्षणिक उपयोग भी किया गया। बच्चों को जवाहर नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए भी मार्गदर्शन दिया जाता है।

पहले भी मिल चुके हैं कई सम्मान

राजेश प्रजापति के शिक्षकीय सफर में सम्मान का सिलसिला पुराना है। 5 सितंबर 2025 को राजभवन रायपुर में उन्हें राज्य शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया गया था। इससे पहले वर्ष 2017 के मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण शिक्षक सम्मान समारोह में उन्हें योजना के तहत शिक्षादूत सम्मान से अलंकृत किया गया था। लगातार मिल रहे ये सम्मान उनके शिक्षण कार्य और शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों को मिली पहचान के रूप में देखे जा रहे हैं।

अब डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी स्मृति पुरस्कार 2026 के लिए चयन उनके सफर की एक और बड़ी उपलब्धि है। ग्रामीण सरकारी स्कूल के बच्चों को बेहतर, संस्कारयुक्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ पढ़ाई में नए प्रयोगों को शामिल करने वाले राजेश प्रजापति की यह उपलब्धि खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के लिए भी गौरव का विषय है।

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