सतीश सिंह, अयोध्या. कृषि का मतलब अब सिर्फ खेत, हल और फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रह गया है. आने वाला समय ड्रोन, डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जैव प्रौद्योगिकी और कृषि उद्यमिता का है. कृषि विश्वविद्यालयों से निकलने वाले युवाओं को इस बदलते दौर के लिए खुद को तैयार करना होगा और अपने ज्ञान को खेतों तक पहुंचाना होगा. यह बात उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने सोमवार को आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, अयोध्या के 28वें दीक्षोत्सव में कही.
राज्यपाल की अध्यक्षता में आयोजित दीक्षोत्सव में कुल 774 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं. इनमें 584 छात्र और 190 छात्राएं शामिल हैं. 388 विद्यार्थियों को स्नातक, 335 को परास्नातक और 51 शोधार्थियों को पीएचडी की डिग्री दी गई. वहीं उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को कुल 25 पदक प्रदान किए गए. इनमें छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 14 पदक हासिल किए, जबकि छात्रों को 11 पदक मिले.
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कम संख्या के बावजूद बेटियों ने मारी बाजी
राज्यपाल ने छात्राओं के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि यह खुशी की बात है कि उपाधि पाने वाली छात्राओं की संख्या छात्रों की तुलना में काफी कम होने के बावजूद पदक हासिल करने में उन्होंने छात्रों को पीछे छोड़ दिया. हालांकि उन्होंने कृषि शिक्षा में बेटियों की कम संख्या को चिंता का विषय बताया. उन्होंने विश्वविद्यालय से कहा कि इस बात पर गंभीरता से विचार किया जाए कि जब बेटियां शिक्षा के दूसरे क्षेत्रों में लगातार आगे बढ़ रही हैं तो कृषि शिक्षा में उनकी भागीदारी अपेक्षाकृत कम क्यों है. उन्होंने अधिक से अधिक बेटियों को कृषि शिक्षा से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास करने पर जोर दिया.
कृषि में युवाओं के लिए संभावनाओं का बड़ा आसमान
आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों से कहा कि कृषि के क्षेत्र में संभावनाओं का दायरा बहुत बड़ा है. कोई युवा ऐसा कृषि उद्यम शुरू कर सकता है, जो हजारों किसानों को बाजार से जोड़े. कोई ऐसा ऐप बना सकता है, जो किसान को मौसम, फसल और बाजार की जानकारी उपलब्ध कराए. कोई स्टार्टअप कम पानी में अधिक उत्पादन की तकनीक विकसित कर सकता है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में हासिल वैज्ञानिक और तकनीकी ज्ञान सिर्फ किताबों और प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए. विद्यार्थियों का ज्ञान खेतों तक पहुंचना चाहिए. किसान के अनुभव और वैज्ञानिक के ज्ञान को एक साथ जोड़कर ही कृषि क्षेत्र में नई क्रांति लाई जा सकती है.
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किसान को तकनीक का मालिक बनाना होगा
राज्यपाल ने कहा कि किसान देश की अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण जीवन की आधारशिला हैं. इसलिए किसानों को सिर्फ उत्पादक के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. किसान को तकनीक का मालिक, बाजार का सहभागी और कृषि अर्थव्यवस्था का मजबूत उद्यमी बनाना होगा.उन्होंने कहा कि किसान की समस्याओं का समाधान केवल खेत में नहीं मिलेगा. इसके लिए किसान के अनुभव, वैज्ञानिक के ज्ञान, कृषि विश्वविद्यालय के शोध और सरकार की योजनाओं को एक साथ लाना होगा.
20 हजार ग्रामीण युवाओं को कृषि उद्यमी बनाने की पहल
राज्यपाल ने ‘प्रगति’ पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका लक्ष्य 20 हजार ग्रामीण युवाओं को कृषि उद्यमी के रूप में तैयार करना और 20 लाख छोटे और सीमांत किसानों की आय, उत्पादकता और आजीविका को मजबूत करना है. उन्होंने विद्यार्थियों से इस पहल से जुड़ने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि गांव का युवा गांव में रहकर किसानों को मिट्टी की जांच, कृषि सलाह, आधुनिक मशीनों की सुविधा, बैंक और वित्तीय संस्थानों से संपर्क तथा बाजार तक पहुंच दिलाने में मदद कर सकता है.
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डिजिटल तकनीक से खेत तक पहुंचेगा वैज्ञानिक ज्ञान
राज्यपाल ने कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल का जिक्र करते हुए कहा कि अब वैज्ञानिक जानकारी सीधे किसान के मोबाइल और खेत तक पहुंचाई जा सकती है. मौसम, बाजार भाव, कीट और रोग तथा मिट्टी की स्थिति के आधार पर किसान को जरूरत के अनुसार सलाह मिल सकती है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कृषि का भविष्य खेतों के साथ-साथ विश्वविद्यालयों और प्रयोगशालाओं में भी तैयार होगा. युवाओं को इस बदलाव का हिस्सा बनना होगा.
मुख्य अतिथि बोले- नौकरी मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें
मुख्य अतिथि कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव एवं आईसीएआर महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने विद्यार्थियों से नौकरी तलाशने के साथ-साथ रोजगार देने वाला बनने की अपील की. उन्होंने कहा कि कृषि भारत की अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण समृद्धि का आधार है. कृषि में मूल्य संवर्धन, पशुपालन, मत्स्य पालन, बागवानी, खाद्य प्रसंस्करण और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से युवाओं के लिए रोजगार और कारोबार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं.


