सतीश सिंह, लखनऊ. गांवों में गोपालन को सिर्फ धार्मिक आस्था और संरक्षण से जोड़ने के बजाय अब इसे आजीविका का साधन बनाने की कोशिश शुरू हुई है. बुलंदशहर में शुरू हुए एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत गोवंश से मिलने वाले दूध के अलावा गोमूत्र को भी ग्रामीण परिवारों की आय का जरिया बनाने की दिशा में सरकार कोशिश में है. यहां किसानों और पशुपालकों से 10 रुपये प्रति लीटर की दर से गोमूत्र खरीदा जा रहा है.
बुलंदशहर के स्याना तहसील के नरसैना गांव से शुरू हुए इस प्रयोग से आसपास के 15 गांव जुड़े हैं. गांवों में ही संग्रह केंद्र बनाए गए हैं, जहां करीब 200 लीटर क्षमता के टैंक लगाए गए हैं. मौजूदा समय में इन केंद्रों से प्रतिदिन करीब 500 लीटर गोमूत्र एकत्र किया जा रहा है. योजना सफल रहने पर खरीद की दर को 20 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ाने की तैयारी है.
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दूध के साथ अब गोमूत्र भी बनेगा आय का स्रोत
ग्रामीण परिवारों के लिए गोपालन की अर्थव्यवस्था आमतौर पर दूध और दुग्ध उत्पादों पर निर्भर रहती है. इस मॉडल में कोशिश है कि पशु से मिलने वाले दूसरे उत्पाद को भी आर्थिक मूल्य दिया जाए. यदि किसी पशुपालक के पास रोजाना कुछ लीटर गोमूत्र संग्रहित होता है तो उसकी नियमित बिक्री से दूध की आमदनी के अलावा एक अतिरिक्त आय बन सकती है. खास बात यह है कि बिक्री के लिए पशुपालक को गांव से बाहर जाने की जरूरत नहीं है. गांव में ही टैंक और संग्रह केंद्र बनाए गए हैं.
महिलाएं बनीं इस मॉडल की आर्थिक ताकत
इस प्रयोग में महिलाओं को सिर्फ संग्रहकर्ता नहीं, बल्कि आर्थिक भागीदार बनाने पर जोर दिया गया है. करीब 300 ग्रामीण महिलाओं को शेयरहोल्डर बनाया गया है. गोमूत्र संग्रह में सहयोग करने वाली महिलाओं को प्रति लीटर दो रुपये कमीशन दिया जा रहा है. इससे महिलाओं को घर और गांव में रहते हुए अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिल रहा है. मॉडल के विस्तार के साथ और महिलाओं को इससे जोड़ने की योजना है.
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गोमूत्र से खेत तक पहुंचेगा पैसा
एकत्र गोमूत्र को सिर्फ खरीदकर आगे बेचने के बजाय उससे खेती में इस्तेमाल होने वाले उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं. इसमें गोमूत्र के साथ विभिन्न जड़ी-बूटियों को मिलाकर कृषि उपयोग के उत्पाद तैयार करने की व्यवस्था है. इन उत्पादों को समितियों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाने की योजना है. इस तरह के मॉडल में गोवंश- पशुपालक -महिला – उत्पाद निर्माण – किसान की स्थानीय अर्थव्यवस्था तैयार करने की कोशिश है.
गो संरक्षण को आर्थिक आधार देने की कोशिश
गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के मुताबिक बुलंदशहर का प्रयोग गो संरक्षण को ग्रामीण रोजगार और महिला सशक्तीकरण से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. यदि यह पायलट प्रोजेक्ट लाभकारी साबित होता है तो इसे अन्यत्र स्थानों पर भी लागू किया जाएगा


