मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को गोरखपुर में नगर निगम परिसर से रेलवे स्टेशन चौक तक करीब ढाई किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा का नेतृत्व किया। उन्होंने महारानी लक्ष्मीबाई को नमन करते हुए कहा कि तिरंगा देश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान और गौरव की अमिट गाथा है।
गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सोमवार को गोरखपुर महानगर के भीतर एक भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन हुआ। नगर निगम प्रांगण से आरंभ होकर रेलवे स्टेशन चौराहा तक जाने वाली इस लगभग ढाई किलोमीटर लंबी पदयात्रा में हजारों की संख्या में स्थानीय नागरिक देशभक्ति के जज्बे के साथ शामिल हुए।
‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प के साथ हाथ में राष्ट्रीय ध्वज थामे मुख्यमंत्री का साथ देने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। यात्रा शुरू करने से पहले जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि देश का राष्ट्रध्वज स्वतंत्रता संग्राम के नायकों के अथक संघर्षों की अमिट गाथा का प्रतीक है।
वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई को दी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने नगर निगम परिसर में स्थापित वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
मंच से अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हमारा ध्वज भारत की आन, बान और शान का सूचक है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अलग-अलग कालखंडों में भिन्न-भिन्न झंडों के माध्यम से क्रांति को गति दी गई। वर्ष 1905 में स्वदेशी का नारा आजादी का मुख्य आधार बना, वहीं 1930 के दशक में चरखा युक्त ध्वज सेनानियों का संबल बना। आजादी मिलने के उपरांत सभी राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले अशोक चक्र के साथ तिरंगे को राष्ट्रध्वज के रूप में अंगीकार किया गया।

राष्ट्रीय ध्वज फहराने का मिला अधिकार
मुख्यमंत्री ने पुरानी सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि अतीत में आम नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज फहराने का अधिकार पाने के लिए अदालतों के चक्कर काटने पड़ते थे। कांग्रेस व अन्य विपक्षी दल जनता को यह हक नहीं दे सके।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2022 में आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान ‘नेशनल फ्लैग कोड’ में संशोधन कर हर देशवासी को सम्मानपूर्वक अपने घर पर तिरंगा फहराने का अधिकार दिया। इसी का नतीजा है कि आज पूरा देश गर्व से अपने घरों पर राष्ट्रीय ध्वज लहरा रहा है।
क्रांतिकारियों के ऐतिहासिक योगदान का स्मरण
सीएम योगी ने स्वतंत्रता संग्राम के मुख्य पड़ावों का जिक्र करते हुए कहा कि बैरकपुर में मंगल पांडेय ने क्रांति की अलख जगाई थी, जिसे गोरखपुर में बंधु सिंह, झांसी में रानी लक्ष्मीबाई, बिठूर में तात्या टोपे और मेरठ में धनसिंह कोतवाल ने आगे बढ़ाया। वर्ष 1922 का चौरीचौरा हादसा हो या 1925 का काकोरी मामला, ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिल गई थी।
उन्होंने कहा कि अंग्रेजों द्वारा जिसे डकैती का नाम दिया गया था, उसे पीएम मोदी ने ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ का ऐतिहासिक दर्जा देकर पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, रोशन सिंह, चंद्रशेखर आजाद, शचीन्द्रनाथ सान्याल और राजेन्द्र लाहिड़ी जैसे महापुरुषों को असली सम्मान दिलाया। पूर्ववर्ती सरकारों में संस्थाओं और मार्गों के नाम केवल एक ही परिवार के नाम पर रखे जाते थे, जबकि आज वास्तविक बलिदानियों को नमन किया जा रहा है।

प्रदेश में 5 करोड़ तिरंगा फहराने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने अपील की कि यात्रा में शामिल सभी लोग हाथों में थामे ध्वज को अपने-अपने आवासों पर स्थापित करें और सेल्फी अपलोड करें। राज्य सरकार ने इस वर्ष प्रदेशभर के 5 करोड़ घरों, सरकारी व निजी संस्थानों पर तिरंगा फहराने का विशाल लक्ष्य निर्धारित किया है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ का अनादर करने की गतिविधि को संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखा है, अतः राष्ट्रीय प्रतीकों का आदर करना सभी का परम कर्तव्य है।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद, सांसद रविकिशन शुक्ल, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विधायक फतेह बहादुर सिंह, श्रीराम चौहान, विपिन सिंह, सरवन निषाद, प्रदीप शुक्ल, एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, कामेश्वर सिंह, विनोद राय, जनार्दन तिवारी और रमेश प्रताप गुप्ता सहित अनेक गणमान्य प्रतिनिधि मंच पर उपस्थित रहे।


