A leopard cannot change its spots… मनुष्य के मूल स्वभाव की ओर संकेत करने वाली एक प्रसिद्ध कहावत है तेंदुआ अपने धब्बे नहीं बदल सकता इस कहावत का इशारा मनुष्य के व्यवहार में गहराई से जुड़े उसके वर्षों की आदत, संस्कार और व्यवहार की तरफ़ है. क्योंकि मनुष्य कुछ समय के लिए अपने व्यवहार में बदलाव का दिखावा कर सकता है, मीठी और चित्ताकर्षक बातें कर सकता है, अच्छा बने रहने की प्रतिज्ञा कर सकता है और अपनी पुरानी लतों को छिपा भी सकता है. लेकिन परिस्थितियाँ विपरीत होते ही सारी कलई खुल जाती है, स्वार्थ सामने आ जाता है व्यक्ति का वास्तविक स्वरूप और स्वभाव प्रकट हो जाता है. एक प्रसिद्ध सुभाषित है स्वभावो नोपदेशेन शक्यते कर्तुमन्यथा. इसका अर्थ है केवल उपदेश से स्वभाव को बदलना आसान नहीं होता.
इसीलिए किसी भी व्यक्ति को उसके शब्दों से नहीं बल्कि लगातार दिखाई देने वाले उसके व्यवहार और कर्मों से पहचानना चाहिए. स्मरण रहे आदतन झूठ बोलने वाला व्यक्ति बार-बार विश्वास तोड़ता है और धोखे की आदत वाला व्यक्ति अवसर मिलने पर फिर वही रास्ता अपनाता है. इसलिए किसी के आज के वादे से अधिक उसके पुराने व्यवहार पर विश्वास कीजिए क्योंकि असली चरित्र शब्दों से नहीं पुराने कर्मों से पहचाना जाता है.एक प्रसिद्ध श्लोक है प्रकृतिं यान्ति भूतानि निग्रहः किं करिष्यति. इसका आशय है प्राणी अंततः अपनी प्रकृति के अनुसार ही चलते हैं.
इस पर भी संतों की धनात्मक सोच यही कहती है कि संकल्पित प्रयास से क्या नही हो सकता क्योंकि यह सत्य है कि मनुष्य चाहे तो आत्मचिंतन, अच्छे संस्कार और निरंतर प्रयास से अपनी सभी बुरी आदतों को बदल सकता है. इस बात को बल देने वाला एक प्रसिद्ध श्लोक है सत्सङ्गत्वे निस्सङ्गत्वं निस्सङ्गत्वे निर्मोहत्वम्.निर्मोहत्वे निश्चलतत्त्वं निश्चलतत्त्वे जीवन्मुक्तिः॥ अर्थात् सत्संग से आसक्ति और मोह कम होते हैं और व्यक्ति के जीवन में वास्तविक परिवर्तन आता है.
संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम



