सत्या राजपूत, रायपुर। स्कूल का गेट पार करते ही विद्यार्थियों के मन में एक ही सवाल घूमता है कहीं आज मेरा अंतिम दिन तो नहीं? क्या हम सुरक्षित घर लौट पाएंगे? यह कोई फिल्मी डायलॉग नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के दलदल सिवनी स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की हकीकत है।
दूर से देखने पर स्कूल भवन आधुनिक शिक्षा मंदिर जैसा लगता है, लेकिन अंदर कदम रखते ही हकीकत कुछ और नजर आती है। फर्श पैरों तले धंस रहा है, दीवारों और नींव में बड़े-बड़े दरार हैं, मानो पूरा भवन किसी भी पल ढह जाएगा। तीन साल पुराना मुख्य स्कूल भवन और मात्र दो साल पुराना अतिरिक्त कक्ष आज 100-150 साल पुरानी इमारत जैसी हालत में पहुंच चुका है।
15 करोड़ की लागत, लेकिन नींव में भ्रष्टाचार?
मिली जानकारी के अनुसार, लोक निर्माण विभाग PWD ने 2019 में मुख्य भवन और 2023 में अतिरिक्त कक्ष बनाकर स्कूल प्रबंधन को हैंडओवर किया था। कुल खर्च 15 करोड़ रुपये से अधिक बताया जा रहा है। फिर भी इमारतें कुछ ही वर्षों में इस कदर जर्जर हो गई कि अब छात्र-छात्राओं की जान को खतरा पैदा हो गया है।


स्कूल में पढ़ते हैं करीब 800 विद्यार्थी
स्कूल में करीब 800 विद्यार्थी पढ़ते हैं और संख्या हर साल बढ़ रही है, लेकिन पढ़ाई का माहौल कहाँ? बच्चे किताबों से ज्यादा छत और दीवारों पर नजर टिकाए रहते हैं। शिक्षक बरामदों में बैठने को मजबूर हैं। बेंच-कुर्सियां कमरों से बाहर निकाल दी गई हैं, क्योंकि अंदर बैठना जोखिम भरा है। स्कूल में लगे एक-एक ईट में भ्रष्टाचार हुआ है, कुछ कमरों की हालत बद से बदतर हो गई है तो कुछ कमरों में जान जोखिम में डालकर बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं।
छात्रों ने कहा – जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर
विद्यार्थियों से बातचीत में दहशत साफ झलक रही थी। लगभग सालभर में स्कूल भवन ज्यादा खराब हुआ है। एक छात्र ने बताया कि फ्लोर धंस गया है। पैर रखते ही कई जगह गड्ढा हो जाता है। गिरने से कई बच्चों के पैर में चोट आई है। दीवारों में बड़े-बड़े दरार हो गए हैं। तेज अंधड़, तूफान या बारिश में मन घबराता है कि कहीं स्कूल भवन की दीवार गिर न जाए। कई दिन हम आपस में बात करते हैं कि आज स्कूल भवन गिरेगा तो नहीं? क्या यह हमारा अंतिम दिन है? दूसरे विद्यार्थी ने कहा, हम लोग जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर हैं। हम सरकार से गुहार लगाते हैं कि हमें शिक्षा चाहिए, स्कूल नहीं छोड़ेंगे, स्कूल की व्यवस्था ठीक कराएं।

सुलगते गंभीर सवाल
- जब भवन इतनी तेजी से जर्जर हो रहा था तो स्कूल प्रबंधन ने उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट क्यों नहीं दी?
- गर्मी की छुट्टियों में स्कूल बंद रहने पर मरम्मत का काम क्यों नहीं कराया गया?
- क्या भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की आड़ में इस मामले को दबाने की कोशिश हो रही है?
शिक्षा विभाग, निर्माण एजेंसी और समूची व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। एक ओर स्मार्ट क्लासरूम और डिजिटल शिक्षा के सपने दिखाए जा रहे हैं, दूसरी ओर बच्चों को दरकती दीवारों और धंसते फर्श के बीच भविष्य संवारने को मजबूर किया जा रहा है। दलदल सिवनी का यह स्कूल केवल एक इमारत नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की जड़ों में पसरे भ्रष्टाचार और लापरवाही का प्रतीक बन चुका है। बच्चे डरते हैं, फिर भी रोज स्कूल आ रहे हैं। सवाल है कि अब इंतजार कब तक? कब तक इन मासूमों की जान को खतरे में डाला जाएगा?
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