उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा क्षेत्रीय संगठन में बदलाव की तैयारी कर रही है. दिल्ली में हुई बैठक में छह क्षेत्रों की टीम और पदाधिकारियों के नामों पर जातीय व स्थानीय समीकरणों के आधार पर चर्चा हुई.

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने संगठन को चुनावी लिहाज से तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी है. बुधवार को प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े के साथ बैठक की. बैठक में प्रदेश के क्षेत्रीय संगठन को अंतिम रूप देने को लेकर चर्चा हुई.

छह क्षेत्रों पर मंथन

बैठक में उत्तर प्रदेश के सभी छह क्षेत्रों के लिए टीम गठित करने को लेकर जातीय और स्थानीय समीकरणों पर विचार किया गया. इसके साथ ही निगम, आयोग और बोर्ड में पदाधिकारियों के लिए संभावित नामों पर भी मंथन किया गया. पार्टी की ओर से अगस्त के अंत तक इन पदाधिकारियों की घोषणा किए जाने की तैयारी है.

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भाजपा ने इससे पहले 25 जून को प्रदेश पदाधिकारियों और क्षेत्रीय अध्यक्षों के नाम घोषित किए थे. इससे पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 4 और 5 जून को दो दिवसीय लखनऊ दौरे पर पहुंचे थे, जहां संगठन की कार्यसंस्कृति को लेकर विस्तृत चर्चा हुई थी.

चुनावी तैयारियों पर जोर

पार्टी ने बूथ सम्मेलन, संत रविदास समरसता संकल्प अभियान और हर घर तिरंगा अभियान के लिए वरिष्ठ नेताओं को मैदान में उतारा है. हालांकि विधानसभा चुनाव का समय नजदीक आने और क्षेत्रीय संगठन में सात साल से बदलाव नहीं होने को लेकर पार्टी के सामने संगठनात्मक चुनौती भी बनी हुई है.

भाजपा अब जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए इसी महीने संगठन से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी में है. इसके बाद नए पदाधिकारियों को चुनावी जिम्मेदारियां देकर मैदान में उतारने की योजना है.

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विपक्षी मुद्दों की चुनौती

भाजपा का आकलन है कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जेन-जी तथा मंदिर चढ़ावा चोरी जैसे मुद्दों को लेकर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रही हैं. ऐसे में पार्टी को विरोधी दलों की घेरेबंदी का जवाब देने के लिए नए नैरेटिव तैयार करने होंगे.

इन मुद्दों को प्रभावी तरीके से सामने रखने और पार्टी की रणनीति को जमीन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी कार्यकर्ताओं पर होगी.