कुमार इंदर, जबलपुर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय (High Court) ने प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों के हित में एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने राज्य प्रशासन और जेल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जेलों में बंद विचाराधीन (Under-trial) और सजायाफ्ता कैदियों के बायोमेट्रिक और अन्य दस्तावेज़ों का केवाईसी (KYC) कराने के लिए विशेष कैंप लगाए जाएं।
बैंक खाते न चलने की समस्या पर कोर्ट का कड़ा रुख
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट के संज्ञान में आया कि जेलों में बंद कैदियों के बायोमैट्रिक विवरण अपडेट न होने के कारण उनके बैंक अकाउंट संचालित नहीं हो पा रहे थे। इसके चलते उन्हें और उनके परिवारों को आर्थिक लेन-देन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि जेलों में शिविर लगाकर कैदियों के- आधार कार्ड, पैन कार्ड, राशन कार्ड तथा अन्य आवश्यक सरकारी दस्तावेजों को अपडेट कराया जाए, ताकि उनके बैंक खाते सुचारू रूप से शुरू हो सकें।
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सिंगरौली के कैदी की याचिका पर आया फैसला
यह अहम फैसला सिंगरौली निवासी कैदी प्रहलाद विश्वकर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए आया है। याचिकाकर्ता प्रहलाद विश्वकर्मा ने कोर्ट को बताया था कि केवाईसी (KYC) और बायोमेट्रिक विवरण न होने के कारण उसका बैंक खाता बंद पड़ा है और वह संचालित नहीं हो पा रहा है।
15 दिनों के भीतर प्रक्रिया शुरू करने का आदेश
जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ (Double Bench) ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर इस पूरी प्रक्रिया को शुरू करने के कड़े निर्देश दिए हैं। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब मध्य प्रदेश की सभी जेलों में कैदियों के आवश्यक दस्तावेजों को अपडेट करने और बैंक खातों को सक्रिय करने के लिए जल्द ही विशेष अभियान चलाया जाएगा।
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