वीरेंद्र गहवई, बिलासपुर। जीएसटी बकाया वसूली से जुड़े एक मामले में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मामला मां काली इंडस्ट्रीज की ओर से दायर रिट याचिका से संबंधित है, जिसमें राज्य कर विभाग द्वारा पारित आदेशों और वसूली कार्रवाई को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता ने 4 नवंबर 2022 और 28 मार्च 2024 के आदेशों के साथ-साथ 16 जनवरी 2026 की अटैचमेंट नोटिस को चुनौती दी थी। इन आदेशों के तहत जीएसटी बकाया की वसूली की कार्रवाई की जा रही थी।

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा 11 जुलाई 2024 को जारी सर्कुलर का हवाला दिया। इस सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि जब तक जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल का गठन नहीं होता, तब तक अपील करने वाले करदाताओं को राहत दी जा सकती है, बशर्ते वे निर्धारित प्री-डिपॉजिट जमा करें और एक अंडरटेकिंग दें। साथ ही 17 सितंबर 2025 की अधिसूचना का भी उल्लेख किया गया, जिसमें अपील दायर करने की समय-सीमा 30 जून 2026 तक बढ़ाई गई है।

जस्टिस राकेश मोहन पांडे की एकलपीठ ने कहा कि इस मामले में अब आगे किसी न्यायिक निर्णय की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि केंद्र सरकार द्वारा पहले ही स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी कि वह संबंधित अधिकारी के समक्ष अंडरटेकिंग/घोषणा प्रस्तुत करे कि ट्रिब्यूनल बनने पर अपील करेगा। जीएसटी कानून के तहत निर्धारित प्री-डिपॉजिट राशि 15 दिनों के भीतर जमा करे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता तय समय में प्री-डिपॉजिट जमा कर देता है और अंडरटेकिंग देता है, तो शेष बकाया राशि की वसूली पर रोक लग जाएगी।

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